दिल्ली हाई कोर्ट ने यमुना किनारे धार्मिक और व्यावसायिक गतिविधियों पर लगाई रोक
'पर्यावरण से खिलवाड़ नहीं', यमुना किनारे धार्मिक और व्यावसायिक गतिविधियों पर दिल्ली HC की रोक
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दिल्ली हाई कोर्ट ने यमुना के बाढ़ क्षेत्र में किसी भी धार्मिक या व्यावसायिक गतिविधि की अनुमति नहीं दी है, इसे पर्यावरण के लिए संवेदनशील मानते हुए। कोर्ट ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) को आदेश दिया है कि वह इस आदेश को सख्ती से लागू करे।
- 01दिल्ली हाई कोर्ट ने यमुना के बाढ़ क्षेत्र में धार्मिक और व्यावसायिक गतिविधियों पर रोक लगाई।
- 02कोर्ट ने कहा कि यह क्षेत्र पर्यावरण के लिए संवेदनशील है।
- 03DDA को आदेश दिया गया है कि वह आदेश का सख्ती से पालन करे।
- 04श्रद्धालुओं के लिए पार्किंग की व्यवस्था यमुना के संवेदनशील क्षेत्र से दूर की जानी चाहिए।
- 05याचिकाकर्ता को आर्थिक नुकसान की भरपाई के लिए अलग से केस दायर करने की छूट दी गई।
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दिल्ली हाई कोर्ट ने यमुना के बाढ़ क्षेत्र में किसी भी धार्मिक या व्यावसायिक गतिविधि की अनुमति नहीं दी है, यह कहते हुए कि यह क्षेत्र पर्यावरण के लिए अत्यंत संवेदनशील है। जस्टिस जसमीत सिंह की बेंच ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) को आदेश दिया कि वह इस आदेश को यमुना सूर घाट पर सख्ती से लागू करे। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि धार्मिक त्योहारों के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा के नाम पर पार्किंग की अनुमति नहीं दी जाएगी। यह आदेश सुरेश कुमार की याचिका पर आया, जिन्होंने एक टेंडर को फिर से बहाल करने की मांग की थी, जिसे MCD और DDA ने रद्द कर दिया था। DDA ने कोर्ट को बताया कि यह जमीन यमुना के बाढ़ क्षेत्र में आती है, इसलिए इसका व्यावसायिक उपयोग नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि यदि श्रद्धालुओं के लिए पार्किंग की आवश्यकता है, तो DDA को यमुना के संवेदनशील क्षेत्र से दूर पार्किंग की व्यवस्था करनी चाहिए।
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यह आदेश यमुना के किनारे धार्मिक और व्यावसायिक गतिविधियों को नियंत्रित करेगा, जिससे पर्यावरण की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
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