भारत और चीन के बीच पानी के संसाधनों का युद्ध: कृषि बनाम तकनीक
वाटर वॉर: पानी को 'धुआं' बना रहा भारत और 'तकनीक' बुन रहा चीन
Aaj Tak
Image: Aaj Tak
भारत और चीन के बीच पानी के संसाधनों के लिए एक गंभीर प्रतिस्पर्धा चल रही है। भारत धान उत्पादन में बढ़ोतरी कर रहा है, जबकि चीन पानी का उपयोग उच्च तकनीकी उद्योगों में कर रहा है। यह संघर्ष भविष्य में जल और खाद्य सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।
- 01भारत धान उत्पादन में दुनिया का सबसे बड़ा उत्पादक बना हुआ है।
- 02चीन ने अपने पानी का उपयोग उच्च तकनीकी उद्योगों में करने की रणनीति अपनाई है।
- 03भारत में इथेनॉल उत्पादन के लिए चावल का उपयोग बढ़ रहा है।
- 04पंजाब और हरियाणा में भूजल स्तर तेजी से गिर रहा है।
- 05भारत को जलखोर फसलों के बजाय विविधीकरण पर ध्यान देना होगा।
Advertisement
In-Article Ad
भारत और चीन, एशिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं, पानी के संसाधनों के लिए एक 'संसाधन युद्ध' में हैं। भारत धान के उत्पादन में बढ़त बनाए हुए है, लेकिन इसके लिए आवश्यक पानी की भारी खपत चिंताजनक है। एक किलो चावल उगाने में लगभग 5000 लीटर पानी लगता है। दूसरी ओर, चीन ने अपनी रणनीति को बदलते हुए पानी का उपयोग सेमीकंडक्टर और अन्य उच्च तकनीकी उत्पादों के निर्माण में करना शुरू कर दिया है। चीन ने धान की खेती का रकबा कम किया है, जिससे वह अपने जल संसाधनों का अधिकतम उपयोग कर सके। भारत में इथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए चावल का उपयोग किया जा रहा है, जिससे 2025 तक 52 लाख टन चावल इथेनॉल के लिए आवंटित किया गया है। हालांकि, यह स्थिति पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में भूजल संकट को बढ़ा रही है। भारत को जलखोर फसलों के बजाय अधिक मूल्यवान उद्योगों की ओर ध्यान देना होगा।
Advertisement
In-Article Ad
भारत में जल संकट बढ़ता जा रहा है, जिससे कृषि पर निर्भर लोगों को समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
Advertisement
In-Article Ad
Reader Poll
क्या भारत को जलखोर फसलों के बजाय तकनीकी उद्योगों पर ध्यान देना चाहिए?
Connecting to poll...
मूल लेख पढ़ें
पूरी कहानी के लिए मूल स्रोत पर जाएं।
-1778597781754.webp&w=1200&q=75)


