अलीबख्श: एक मुस्लिम भक्त की श्री कृष्ण के प्रति अनूठी भक्ति की कहानी
धर्म की दीवारें हुईं बौनी... मुस्लिम परिवार में जन्म, लेकिन दिल में बस गए श्रीकृष्ण! जानें अलीबख़्श की सफर की कहानी

Image: News 18 Hindi
अलीबख्श, जो एक मुस्लिम परिवार में जन्मे, ने अपने जीवन को भगवान श्री कृष्ण की भक्ति में समर्पित कर दिया। उन्होंने लोकनाट्य कला को साधना के रूप में अपनाया और समाज में प्रेम, मानवता और धार्मिक सद्भाव का संदेश फैलाया।
- 01अलीबख्श का जन्म एक मुस्लिम परिवार में हुआ, लेकिन उनका दिल श्री कृष्ण के प्रति अटूट प्रेम से भरा था।
- 02उन्होंने लोकनाट्य कला को साधना के रूप में अपनाया और रचनाएँ लिखीं, जो भक्ति और मानवता का संदेश देती हैं।
- 03अलीबख्श ने कभी धर्म और मजहब के बीच भेद नहीं किया, बल्कि सभी को एक सर्वव्यापक परमात्मा की अभिव्यक्तियाँ माना।
- 04उनकी नाट्य मण्डली में प्रमुख शिष्य पूरण और गोपाल थे, और वे अपने शिष्यों का पुत्रवत ख्याल रखते थे।
- 05अलीबख्श की विचारधारा आज भी सामाजिक सौहार्द और भाईचारे की मिसाल मानी जाती है।
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अलीबख्श की कहानी प्रेम, आस्था और इंसानियत की एक अनोखी मिसाल है। खैरथल तिजारा जिले के मुंडावर में जन्मे अलीबख्श ने एक मुस्लिम परिवार में रहते हुए भगवान श्री कृष्ण के प्रति गहरा प्रेम विकसित किया। उन्होंने अपने जीवन को श्री कृष्ण की भक्ति में समर्पित कर दिया और कई घंटे मंदिर में भजन गाते रहे। अलीबख्श ने लोकनाट्य कला को न केवल एक कला के रूप में, बल्कि साधना के रूप में अपनाया। उनकी रचनाएँ भक्ति, प्रेम, श्रृंगार, करुणा और हास्य जैसे विभिन्न रसों का समावेश करती हैं। अलीबख्श ने धर्म और मजहब की सीमाओं को पार करते हुए सभी देवी-देवताओं और पीर-पैगम्बरों में समानता का संदेश फैलाया। उन्होंने अपनी नाट्य मण्डली बनाई, जिसमें वे स्वयं कलाकारों का मार्गदर्शन करते थे। उनकी विचारधारा आज भी समाज में प्रेम और भाईचारे का प्रतीक मानी जाती है।
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अलीबख्श की कहानी ने क्षेत्र में सामाजिक सौहार्द और भाईचारे को बढ़ावा दिया है।
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