कुल्लू में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि से टैक्सी व्यवसाय पर संकट
पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों से खतरे में टैक्सी कारोबार, कुल्लू में तेल की किल्लत ने बढ़ाई चिंता

Image: Zee News
कुल्लू जिले, हिमाचल प्रदेश में पेट्रोल की कीमतें 100 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमतें 92 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई हैं। ईंधन की बढ़ती कीमतें और आपूर्ति में कमी ने टैक्सी चालकों की चिंता बढ़ा दी है, खासकर पर्यटन सीजन के दौरान। स्थानीय चालक सरकार से इस मुद्दे पर ध्यान देने की अपील कर रहे हैं।
- 01पेट्रोल की कीमत कुल्लू में 100 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 92 रुपये प्रति लीटर पार कर गई है।
- 02टैक्सी चालकों का कहना है कि ईंधन की कमी और बढ़ती लागत के कारण लंबी यात्रा करना मुश्किल हो रहा है।
- 03स्थानीय टैक्सी चालक कविंद्र ठाकुर ने केंद्र सरकार से इस समस्या पर ध्यान देने का आग्रह किया है।
- 04महंगाई के कारण टैक्सी किराए में वृद्धि की संभावना है, जिससे आम जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ सकता है।
- 05पेट्रोल पंप मैनेजर ने कहा कि फिलहाल सभी वाहनों को पर्याप्त तेल दिया जा रहा है, लेकिन भविष्य में सरकार के दिशा-निर्देशों का पालन किया जाएगा।
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कुल्लू जिले, हिमाचल प्रदेश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हालिया वृद्धि ने स्थानीय टैक्सी व्यवसाय को संकट में डाल दिया है। शनिवार को पेट्रोल की कीमत 100 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 92 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई। यह वृद्धि इस महीने में तीसरी बार हुई है। ईंधन की बढ़ती कीमतों के साथ-साथ कई पेट्रोल पंपों पर तेल की कमी की भी खबरें आ रही हैं, जिससे टैक्सी चालकों और आम जनता में चिंता बढ़ गई है। स्थानीय टैक्सी चालक, जैसे कि कविंद्र ठाकुर, ने सरकार से इस मुद्दे पर ध्यान देने का आग्रह किया है, यह बताते हुए कि बढ़ती कीमतें केवल वाहन चालकों पर ही नहीं, बल्कि महंगाई पर भी प्रभाव डालती हैं। प्रेमचंद, एक अन्य टैक्सी चालक, ने कहा कि ईंधन की महंगाई के कारण किराया बढ़ाना पड़ सकता है। स्थानीय निवासी सुनील शर्मा ने भी कीमतों में वृद्धि के कारण आम जनता पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ की चिंता जताई। हालांकि, पेट्रोल पंप के मैनेजर रशपाल शर्मा ने कहा कि उनके पंप पर सभी वाहनों को पर्याप्त मात्रा में तेल मिल रहा है।
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ईंधन की बढ़ती कीमतें और आपूर्ति में कमी टैक्सी व्यवसाय को प्रभावित कर रही हैं, जिससे किराए में वृद्धि हो सकती है और आम जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ सकता है।
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