उत्तरकाशी: भगवान परशुराम की तपस्थली और सौम्यकाशी का रहस्य
उत्तराखंड के इस जिले से भगवान परशुराम का नाता, शांत हुआ था क्रोध; जानें सौम्यकाशी का रहस्य
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उत्तरकाशी जनपद, जिसे भगवान परशुराम की तपस्थली माना जाता है, का नाम 'सौम्यकाशी' भी है। यहां भगवान परशुराम ने अपने माता-पिता के अपमान के बाद वरुणावत पर्वत पर तपस्या की थी, जिससे उनका क्रोध शांत हुआ। इस क्षेत्र में भगवान परशुराम का प्राचीन मंदिर भी स्थित है।
- 01उत्तरकाशी को भगवान परशुराम की तपस्थली माना जाता है।
- 02भगवान परशुराम ने अपने माता-पिता के अपमान के बाद तपस्या की थी।
- 03यहां भगवान परशुराम का प्राचीन मंदिर है।
- 04उत्तरकाशी का नाम 'सौम्यकाशी' भी है।
- 05परशुराम जन्मोत्सव पर शोभा यात्रा का आयोजन किया जाएगा।
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उत्तरकाशी जनपद, उत्तराखंड, को भगवान परशुराम की तपस्थली माना जाता है। मान्यता है कि भगवान परशुराम ने अपने माता-पिता के अपमान के कारण 21 बार क्षत्रियों का संहार किया। जब उनका क्रोध शांत नहीं हुआ, तो उन्होंने वरुणावत पर्वत पर तपस्या की। इस तपस्या के बाद उनका रौद्र रूप सौम्य हो गया, जिससे इस क्षेत्र का नाम 'सौम्यकाशी' पड़ा। यहां परशुराम का प्राचीन मंदिर भी है, जिसमें भगवान विष्णु के चौबीस अवतारों की मूर्तियां हैं। परशुराम जन्मोत्सव पर इस मंदिर से शोभा यात्रा निकाली जाएगी और दिनभर भजन-कीर्तन का आयोजन होगा।
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यह आयोजन स्थानीय समुदाय के लिए धार्मिक और सांस्कृतिक महत्त्व रखता है।
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