झांसी की अरुण कुमारी ने गोपालन से बनाई पहचान और आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की
गोपालन और दुग्ध उत्पादन से झांसी के रूंद करारी गांव की अरुण कुमारी ने बनाई पहचान
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झांसी के रूंद करारी गांव की अरुण कुमारी ने दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में कदम बढ़ाते हुए आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है। उन्होंने अपनी दस गायों से प्रतिदिन लगभग 40 लीटर दूध उत्पादन कर हर महीने 45 हजार रुपए से अधिक की कमाई की है।
- 01अरुण कुमारी ने गोपालन से आत्मनिर्भरता हासिल की है।
- 02उनकी गायें प्रतिदिन लगभग 40 लीटर दूध देती हैं।
- 03हर महीने उनकी कमाई 45 हजार रुपए से अधिक है।
- 04उन्हें बलिनी मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी द्वारा 9500 रुपए का बोनस मिला।
- 05गांव में दुग्ध संकलन केंद्रों की स्थापना से दूध की बिक्री में सुधार हुआ है।
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झांसी, उत्तर प्रदेश के रूंद करारी गांव की अरुण कुमारी ने दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई है। योगी सरकार की नीति के तहत, बुंदेलखंड क्षेत्र में महिलाओं ने दुग्ध उत्पादन की ओर कदम बढ़ाया है। अरुण ने दस गायें पाल रखी हैं, जो मिलकर प्रतिदिन लगभग 40 लीटर दूध देती हैं। इससे उनकी मासिक आय 45 हजार रुपए से अधिक हो गई है। उनके पति, राजेंद्र कुमार, भी इस काम में उनका सहयोग करते हैं। हाल ही में, उन्हें बलिनी मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी द्वारा 9500 रुपए का बोनस देकर सम्मानित किया गया। अरुण कुमारी ने बताया कि पहले दूध की बिक्री की व्यवस्था नहीं होने के कारण उन्हें कम दाम पर दूध बेचना पड़ता था, लेकिन अब गांव में दुग्ध संकलन केंद्र की स्थापना से दूध की बिक्री में आसानी हो गई है। यह न केवल उनके परिवार की आमदनी बढ़ाने में मददगार साबित हुआ है, बल्कि अन्य महिलाओं को भी इस दिशा में प्रेरित किया है।
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अरुण कुमारी के गोपालन से न केवल उनके परिवार की आय बढ़ी है, बल्कि अन्य महिलाएं भी इस क्षेत्र में कदम रखकर आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही हैं।
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