मध्यप्रदेश की बाघिनें 'राधा' और 'मस्तानी' बनीं 'सुपर मॉम्स', संघर्ष की कहानी
मौत के कुएं और जहर से जंग जीतकर बनीं 'सुपर मॉम्स', टाइगर स्टेट में बाघिन 'राधा और मस्तानी' ने जंगल में रचा नया इतिहास
Nbt NavbharattimesImage: Nbt Navbharattimes
मध्यप्रदेश के वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में बाघिनें 'राधा' और 'मस्तानी' ने कठिनाइयों का सामना कर मातृत्व की मिसाल पेश की है। राधा ने जहरखुरानी से बचकर 10 शावकों को जन्म दिया, जबकि मस्तानी ने गहरे कुएं में गिरकर 5 घंटे मौत से संघर्ष किया और अब अपने 4 शावकों के साथ सुरक्षित हैं।
- 01बाघिन राधा ने जहरखुरानी से बचकर मातृत्व की नई कहानी लिखी है।
- 02मस्तानी ने गहरे कुएं में गिरकर 5 घंटे तक मौत से संघर्ष किया।
- 03दोनों बाघिनें अब अपने शावकों के साथ जंगल में सुरक्षित हैं।
- 04इन बाघिनों की कहानियाँ संघर्ष और मातृत्व की प्रेरणा देती हैं।
- 05इनकी कहानियों ने लोगों के दिलों में जगह बनाई है।
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मध्यप्रदेश के वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में बाघिनें 'राधा' और 'मस्तानी' ने अपने संघर्षों से मातृत्व की एक नई परिभाषा प्रस्तुत की है। बाघिन राधा (N-1) ने जहरखुरानी के कारण अपने पूरे परिवार को खो दिया था, लेकिन उसने हार नहीं मानी। वन विभाग की मदद से वह स्वस्थ हुई और अब तक 10 शावकों की मां बन चुकी है। वहीं, बाघिन मस्तानी (N-6) ने 15 फीट गहरे कुएं में गिरकर 5 घंटे तक मौत से संघर्ष किया और अंततः अपने 4 शावकों के साथ जंगल में सुरक्षित नजर आई। इन दोनों बाघिनों की कहानियाँ सिर्फ उनके जीवित रहने की नहीं, बल्कि मातृत्व और संघर्ष की प्रेरणा देती हैं। वन अधिकारियों का कहना है कि इन बाघिनों ने साबित किया है कि प्रकृति में मातृत्व और संघर्ष की ताकत सबसे बड़ी होती है, जिससे इन्हें 'सुपर मॉम्स' का नाम दिया गया है।
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इन बाघिनों की कहानियाँ न केवल वन्यजीव संरक्षण के लिए प्रेरणा देती हैं, बल्कि स्थानीय समुदायों में वन्यजीवों के प्रति जागरूकता भी बढ़ाती हैं।
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