मानव शरीर की गर्मी सहन करने की क्षमता और इसके प्रभाव
कितनी गर्मी झेल सकता है शरीर? इस तापमान के बाद अंग भी छोड़ने लगते हैं साथ
Aaj Tak
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गर्मी और बढ़ती नमी के कारण मानव शरीर की सहनशक्ति सीमित होती जा रही है। वैज्ञानिकों के अनुसार, 35 डिग्री सेल्सियस का वेट-बल्ब तापमान शरीर की सहनशक्ति की अंतिम सीमा है। इससे अधिक तापमान पर अंगों के फेल होने का खतरा बढ़ जाता है।
- 01मानव शरीर का सामान्य तापमान लगभग 37 डिग्री सेल्सियस है।
- 0235 डिग्री सेल्सियस का वेट-बल्ब तापमान सहनशक्ति की अंतिम सीमा है।
- 0340 डिग्री सेल्सियस से ऊपर का आंतरिक तापमान हीट स्ट्रोक का संकेत है।
- 04उमस भरी गर्मी सूखी गर्मी से अधिक खतरनाक होती है।
- 05ग्लोबल वार्मिंग से हीट टॉलरेंस की सीमाएं तेजी से कम हो रही हैं।
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गर्मी और बढ़ते तापमान के कारण मानव शरीर की सहनशक्ति लगातार चुनौती में है। MIT टेक्नोलॉजी रिव्यू के अनुसार, सामान्य शरीर का तापमान लगभग 37 डिग्री सेल्सियस होता है। जब बाहरी तापमान बढ़ता है, तो शरीर पसीने के जरिए खुद को ठंडा करने की कोशिश करता है। लेकिन जब 35 डिग्री सेल्सियस का वेट-बल्ब तापमान (जो लगभग 46 डिग्री सेल्सियस की सूखी गर्मी के बराबर है) पार हो जाता है, तो शरीर ठंडा नहीं रह पाता। अत्यधिक गर्मी के कारण आंतरिक तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है, जिसे हीट स्ट्रोक कहा जाता है। इस स्थिति में, दिल शरीर को ठंडा करने के लिए तेजी से खून पंप करता है, जिससे महत्वपूर्ण अंगों को ऑक्सीजन की कमी हो सकती है। पेंसिल्वेनिया स्टेट यूनिवर्सिटी की स्टडी के अनुसार, उमस भरी गर्मी सूखी गर्मी से ज्यादा जानलेवा होती है। इस प्रकार, ग्लोबल वार्मिंग के कारण हीट टॉलरेंस की सीमाएं तेजी से घट रही हैं।
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गर्मी और नमी के बढ़ते स्तर से स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है, जिससे लोगों को हीट स्ट्रोक और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
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