आगरा के डॉ. संतोष गोयल: नेत्रहीन शिक्षक की प्रेरणादायक कहानी
अंग्रेजी से PhD, एनडीए में 3 साल रहे टीचर, आगरा के मंदिर में मैले कपड़ों में दिन काट रहे डॉ. संतोष गोयल की कहानी
Nbt NavbharattimesImage: Nbt Navbharattimes
आगरा, उत्तर प्रदेश के डॉ. संतोष गोयल, जो नेत्रहीन हैं, ने 1971 में अंग्रेजी से पीएचडी की और नेशनल डिफेंस एकेडमी में 3 साल शिक्षक रहे। आज वे मंदिर में रहकर छात्रों को पढ़ाते हैं और मिठाई की दुकान से भोजन प्राप्त करते हैं। उनकी कहानी संघर्ष और शिक्षा के प्रति समर्पण की मिसाल है।
- 01डॉ. संतोष गोयल ने 1971 में अंग्रेजी से पीएचडी की है।
- 02उन्होंने नेशनल डिफेंस एकेडमी में 3 साल शिक्षक के रूप में काम किया।
- 03नेत्रहीनता के बावजूद, वे आज भी छात्रों को पढ़ाते हैं।
- 04उनकी आर्थिक स्थिति खराब है, लेकिन वे शिक्षा के प्रति समर्पित हैं।
- 05वे मिठाई की दुकान से भोजन प्राप्त करते हैं और मंदिर में रहते हैं।
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आगरा, उत्तर प्रदेश के डॉ. संतोष गोयल की कहानी प्रेरणादायक है। 70 वर्षीय डॉ. गोयल ने 1971 में अंग्रेजी से पीएचडी की और नेशनल डिफेंस एकेडमी में 3 साल शिक्षक के रूप में कार्य किया। उनकी आंखों की समस्या के कारण उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया, जिससे उन्हें पेंशन का लाभ नहीं मिला। वे आज भी मंदिर में रहकर एमए के छात्रों को पढ़ाते हैं। उनकी आर्थिक स्थिति खराब है, लेकिन वे शिक्षा के प्रति अपने जज्बे को बनाए रखते हैं। मिठाई की दुकान से उन्हें भोजन मिलता है, और हाल ही में जीएसटी कमिश्नर अजय मिश्र से उनकी मुलाकात ने उन्हें खुशी दी। उनका वीडियो वायरल हुआ, जिसमें वे फर्राटेदार अंग्रेजी बोलते हुए दिखाई दे रहे हैं।
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डॉ. गोयल की कहानी ने स्थानीय समुदाय में शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाई है और यह दिखाया है कि कठिनाइयों के बावजूद शिक्षा का महत्व कितना है।
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