पंजाब में बेअदबी कानून पर सिख संगठनों और सरकार के बीच बढ़ता विवाद
पंजाब में बेअदबी कानून पर बढ़ा टकराव: आमने-सामने सरकार और सिख संगठन, जत्थेदार बोले- मीठा जहर स्वीकार नहीं

Image: Amar Ujala
पंजाब सरकार द्वारा लागू किए गए द जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) एक्ट-2026 के खिलाफ सिख संगठनों का विरोध बढ़ रहा है। जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने इसे 'मीठा जहर' बताते हुए कानून के कुछ प्रावधानों पर आपत्ति जताई है।
- 01पंजाब सरकार का कहना है कि यह कानून बेअदबी की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए आवश्यक है।
- 02एसजीपीसी और अन्य सिख संगठनों ने कानून के कुछ प्रावधानों पर गंभीर आपत्तियां उठाई हैं।
- 03जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने इसे 'मीठा जहर' कहा है, जिसे सिख समुदाय स्वीकार नहीं करेगा।
- 04उन्होंने आरोप लगाया कि यह कानून सिख धार्मिक संस्थाओं में हस्तक्षेप का प्रयास है।
- 05सरकार को बेअदबी के दोषियों को सख्त सजा दिलाने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
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पंजाब में द जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) एक्ट-2026 को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। सरकार इसे बेअदबी की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए आवश्यक कदम बता रही है, जबकि सिख संगठनों, विशेषकर एसजीपीसी, ने कानून के कुछ प्रावधानों पर आपत्ति जताई है। श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने इस कानून को 'मीठा जहर' करार दिया है, जो सिख समुदाय द्वारा स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह कानून सिख धार्मिक संस्थाओं में हस्तक्षेप का प्रयास है। ज्ञानी गड़गज्ज ने यह भी कहा कि सिख समाज बेअदबी के दोषियों को कड़ी सजा देने का समर्थन करता है, लेकिन कानून में कुछ प्रावधानों को लेकर गंभीर आपत्तियां हैं। उन्होंने पंजाब विधानसभा को सिख धार्मिक परंपराओं और मर्यादाओं को निर्धारित करने का अधिकार नहीं देने की बात की। सरकार को बेअदबी मामलों के दोषियों को गिरफ्तार करने और सख्त सजा दिलाने पर ध्यान देना चाहिए। सिख संगठनों ने सरकार को अपनी आपत्तियों के समाधान के लिए 15 दिन का समय दिया था, लेकिन अब तक कोई सकारात्मक पहल नहीं हुई है।
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सिख समुदाय के धार्मिक अधिकारों और परंपराओं पर इस कानून का प्रभाव पड़ सकता है।
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