भारत में वाणिज्यिक परमाणु उद्योग के लिए नए अवसर: अमेरिकी प्रतिनिधि
शांति अधिनियम ने भारत में वाणिज्यिक परमाणु उद्योग के लिए अनेक अवसर खोल दिए हैं : अमेरिकी प्रतिनिधि
Image: Nbt Navbharattimes
अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने भारत में शांति अधिनियम, 2025 के तहत वाणिज्यिक परमाणु उद्योग के लिए नए अवसरों का उल्लेख किया है। न्यूक्लियर एनर्जी इंस्टीट्यूट और अमेरिका-भारत रणनीतिक साझेदारी मंच के नेतृत्व में, प्रतिनिधिमंडल ने भारतीय कंपनियों के साथ सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की, विशेष रूप से छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों के क्षेत्र में।
- 01अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल में न्यूक्लियर एनर्जी इंस्टीट्यूट और अन्य कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल हैं।
- 02एनईआई की अध्यक्ष मारिया कोर्सनिक ने कहा कि वे भारतीय वाणिज्यिक परमाणु क्षेत्र के साथ मिलकर काम करना चाहते हैं।
- 032008 में भारत और अमेरिका के बीच असैन्य परमाणु समझौते के बाद, अमेरिकी कंपनियों को गुजरात और आंध्र प्रदेश में परमाणु संयंत्र स्थापित करने का अवसर मिला।
- 04भारत और अमेरिका छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों (एसएमआर) में सहयोग की संभावनाएं तलाश रहे हैं।
- 05प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय मंत्रियों से स्वच्छ ऊर्जा और प्रौद्योगिकियों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की।
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नई दिल्ली में, एक उच्च स्तरीय अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने शांति अधिनियम, 2025 के तहत भारत में वाणिज्यिक परमाणु उद्योग के लिए नए अवसरों की चर्चा की। न्यूक्लियर एनर्जी इंस्टीट्यूट (एनईआई) और अमेरिका-भारत रणनीतिक साझेदारी मंच के नेतृत्व में आए इस प्रतिनिधिमंडल में परमाणु ऊर्जा से जुड़ी कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल हैं। एनईआई की अध्यक्ष और सीईओ मारिया कोर्सनिक ने बताया कि वे भारतीय वाणिज्यिक परमाणु क्षेत्र और सरकार के साथ मिलकर काम करना चाहते हैं। 2008 में भारत और अमेरिका के बीच असैन्य परमाणु समझौते के बाद, अमेरिकी कंपनियों को गुजरात में छायामिथी विर्दी और आंध्र प्रदेश में कोववाड़ा में 1000 मेगावाट के परमाणु ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने का अवसर मिला। इसके अलावा, प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय मंत्रियों मनोहर लाल खट्टर और जितेंद्र सिंह से मुलाकात की, जिसमें स्वच्छ ऊर्जा और महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों में भारत-अमेरिका सहयोग को बढ़ाने पर चर्चा की गई। छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों (एसएमआर) के क्षेत्र में भी सहयोग की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं, जो भविष्य की परमाणु ऊर्जा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माने जा रहे हैं।
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यह सहयोग भारतीय वाणिज्यिक परमाणु क्षेत्र में निवेश और विकास को बढ़ावा देगा, जिससे ऊर्जा सुरक्षा में सुधार होगा।
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