उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटरों की तकनीकी खामियों पर बिजली विभाग के अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ीं
UP में स्मार्ट मीटर पर फिर घिरे बिजली विभाग के अफसर, तीन साल बाद भी दूर नहीं हुई खामियां
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उत्तर प्रदेश में बिजली के स्मार्ट मीटरों में तकनीकी खामियां फिर से सामने आई हैं, जो तीन साल पहले भी चर्चा में थीं। उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष ने कहा कि यदि पावर कारपोरेशन प्रबंधन ने पहले की रिपोर्ट से सीख ली होती, तो वर्तमान समस्याएं नहीं होतीं।
- 01स्मार्ट मीटरों में तकनीकी खामियां तीन साल बाद भी बनी हुई हैं।
- 02उपभोक्ता परिषद ने पावर कारपोरेशन प्रबंधन की लापरवाही की आलोचना की।
- 03ऊर्जा मंत्रालय ने 2023 में स्मार्ट मीटरों की जांच के लिए उच्च स्तरीय समिति का गठन किया था।
- 04मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तकनीकी खामियों की जांच के लिए चार सदस्यीय टीम का गठन किया।
- 05स्मार्ट प्रीपेड मीटर की व्यवस्था समाप्त की जा चुकी है।
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उत्तर प्रदेश में बिजली के स्मार्ट मीटरों में तकनीकी खामियां फिर से उजागर हुई हैं, जो पहले भी समस्या का कारण बनी थीं। उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने कहा कि यदि पावर कारपोरेशन प्रबंधन ने केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय की 2023 की रिपोर्ट से सीख ली होती, तो उपभोक्ताओं को वर्तमान में परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता। 2019 से 2022 के बीच लगाए गए 12 लाख स्मार्ट मीटरों में शिकायतों के बाद, ऊर्जा मंत्रालय ने उच्च स्तरीय समिति का गठन किया था। इस बार भी स्मार्ट मीटरों में नेटवर्क की समस्याएं, बिलिंग प्रणाली में अनियमितताएं और अन्य तकनीकी खामियां सामने आई हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इन खामियों की जांच के लिए चार सदस्यीय टीम गठित की है, लेकिन रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक नहीं की गई है। इस बीच, स्मार्ट प्रीपेड मीटर की व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया है।
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स्मार्ट मीटरों की तकनीकी खामियों के कारण उपभोक्ताओं को बिलिंग और नेटवर्क समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
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