पुरुषोत्तम मास की कथा: नारदजी और भगवान नारायण का संवाद
Purushottam Maas Katha 2 : पुरुषोत्तम (मलमास) मास कथा अध्याय 2, नारदजी पहुंचे भगवान नारायण के पास
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पुरुषोत्तम मास की कथा के दूसरे अध्याय में, नारद मुनि भगवान नारायण के पास पहुंचे और उनसे इस पवित्र मास के महत्व के बारे में पूछा। भगवान नारायण ने बताया कि इस मास में श्रद्धापूर्वक व्रत, जप, दान और पूजा करने से भक्तों को सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है।
- 01राजा परीक्षित ने गंगा तट पर भगवान शुकदेवजी से श्रीमद्भागवत की कथा सुनकर मोक्ष प्राप्त किया।
- 02भगवान नारायण ने नारदजी को पुरुषोत्तम मास का महत्व बताया, जो सभी कष्टों का निवारण करता है।
- 03इस मास में श्रद्धापूर्वक व्रत, जप, दान और पूजा करने से भक्तों पर भगवान की कृपा बरसती है।
- 04नारदजी ने भगवान से पूछा कि इस मास में कौन-से नियमों का पालन करना चाहिए।
- 05भगवान नारायण ने नारदजी को बताया कि पुरुषोत्तम मास का पालन सभी दुखों का समाधान करता है।
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पुरुषोत्तम मास की कथा के दूसरे अध्याय में सूतजी ने बताया कि राजा परीक्षित ने गंगा तट पर भगवान शुकदेवजी से अमृतमयी कथा सुनकर मोक्ष प्राप्त किया। नारद मुनि, जो भगवान नारायण के पास पहुंचे, ने उनसे इस पवित्र मास के महत्व के बारे में पूछा। नारदजी ने भगवान से निवेदन किया कि वे उन्हें इस मास के रहस्य और इसके पालन के नियमों के बारे में विस्तार से बताएं। भगवान नारायण ने उन्हें बताया कि पुरुषोत्तम मास अत्यंत पवित्र है और इस मास में श्रद्धापूर्वक व्रत, जप, दान और पूजा करने से भक्तों पर भगवान की कृपा होती है। इस मास का पालन करने से सभी कष्टों का निवारण होता है। नारदजी के करुणामय वचनों को सुनकर भगवान नारायण ने आगे की कथा सुनाने का निर्णय लिया, जिससे समस्त संसार का कल्याण हो सके।
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