15 जून तक शुभ कार्यों पर रोक: जानें अधिक मास का महत्व
15 जून तक शुभ कार्य बंद! जानें क्यों देवताओं ने ठुकरा दिया था अधिक मास

Image: Aaj Tak
15 जून तक चलने वाला अधिक मास, जिसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है, शुभ कार्यों के लिए निषिद्ध है। यह समय आध्यात्मिक उन्नति और तप का माना जाता है, जबकि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दौरान सांसारिक कार्यों से बचना चाहिए।
- 01अधिक मास, 17 मई से 15 जून तक, शुभ कार्यों के लिए निषिद्ध है और इसे पुरुषोत्तम मास कहा जाता है।
- 02इस दौरान विवाह, सगाई, और गृह प्रवेश जैसे कार्यों को टालना शुभ माना जाता है।
- 03अधिक मास का आधार प्राचीन खगोल विज्ञान में है, जो चंद्र और सौर वर्ष के बीच के अंतर को संतुलित करता है।
- 04भगवान विष्णु ने इस महीने को अपना नाम देकर इसे विशेष महत्व दिया।
- 05इस दौरान धार्मिक कार्यों, दान और पूजा-पाठ को बढ़ावा देने की सलाह दी जाती है।
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अधिक मास, जो 17 मई से 15 जून तक चलता है, को पुरुषोत्तम मास के रूप में जाना जाता है। इस विशेष अवधि के दौरान शुभ कार्यों की मनाही होती है, जैसे विवाह, सगाई, और गृह प्रवेश। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस महीने को देवताओं ने ठुकरा दिया था, क्योंकि इसका कोई अधिपति नहीं था। भगवान विष्णु ने इसे अपना नाम देकर इसे विशेष महत्व दिया और कहा कि इस दौरान जो भी भक्ति करेगा, उसे विशेष पुण्य मिलेगा। अधिक मास का आधार प्राचीन खगोल विज्ञान पर है, जिसमें चंद्र और सौर वर्ष के बीच का अंतर संतुलित करने के लिए एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है। इस समय का उपयोग आध्यात्मिक उन्नति के लिए किया जाना चाहिए, जबकि सांसारिक कार्यों से बचना चाहिए। स्कंद पुराण के अनुसार, इस महीने में धार्मिक कार्य करने पर 100 गुना अधिक फल मिलता है।
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इस अवधि में शुभ कार्यों की मनाही होने से लोग अपनी योजनाओं को स्थगित कर सकते हैं, जिससे विवाह और अन्य आयोजनों पर असर पड़ेगा।
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