सरकारी पैसे और बाजार की पारदर्शिता बचाने के लिए CAG-CCI साझेदारी जरूरी: संजय मूर्ति
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नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी)संजय मूर्ति ने बुधवार को सीएजी और भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) के बीच मजबूत संस्थागत साझेदारी का आह्वान किया। उन्होंने तर्क दिया कि ऑडिट के निष्कर्ष और प्रतिस्पर्धा प्रवर्तन भारत के सार्वजनिक वित्त और बाजार की अखंडता की रक्षा के लिए पूरक हैं। सीसीआई के 17वें वार्षिक समारोह में मूर्ति ने कहा कि दोनों निकायों के बीच संबंध ‘आकस्मिक नहीं, बल्कि ढांचागत है’। जब आपूर्तिकर्ता सरकारी खरीद में कीमतों को तय करते हैं या बोलियों में हेरफेर करते हैं तो प्रतिस्पर्धा कानून का उल्लंघन भी करते हैं और ‘सार्वजनिक खजाने को सीधा और अच्छा खासा नुकसान’ पहुंचाते हैं। सर्वोच्च ऑडिट संस्थानों और प्रतिस्पर्धा प्राधिकरणों ने बाजारों व उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए मिलकर काम करने वाले देशों दक्षिण कोरिया और दक्षिण अफ्रीका के उदाहरणों का हवाला देते हुए मूर्ति ने तर्क दिया कि भारत को भी खासकर बड़े सार्वजनिक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में ऐसे ही संस्थागत सहयोग की आवश्यकता है। मूर्ति ने कहा, ‘प्रतिस्पर्धी खरीद के माध्यम से बचाया गया हर रुपया वह रुपया है जिसे नागरिकों के कल्याण में लगाया जा सकता है, चाहे वह अतिरिक्त दवा के लिए हो, स्कूल के कंप्यूटर के लिए हो, या बच्चे के लिए कक्षा के लिए हो।’ उन्होंने कहा, ‘प्रतिस्पर्धा न होने की कीमत कभी भी अमूर्त नहीं होती। हमेशा इसका बोझ किसी न किसी को उठाना पड़ता है, और वह व्यक्ति हमेशा आम नागरिक ही होता है।’ सीसीआई की चेयरपर्सन रवनीत कौर ने आर्टिफिशल इंटेलिजेंस को नियामक के सामने सबसे महत्त्वपूर्ण चुनौती और पुलिसिंग के लिए सबसे कठिन बताया। उन्होंने कहा, ‘आर्टिफिशल इंटेलिजेंस ने वास्तव में पैमाने और गति को बदल दिया है। उपकरण बहुत परिष्कृत हो गए हैं। यह स्थापित करना बहुत मुश्किल हो गया है कि प्रतिस्पर्धा विरोधी प्रभाव हो रहे हैं।’एआई प्रणाली की अपारदर्शिता को मुख्य बाधा माना गया है।
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