कांग्रेस के आ गए अच्छे दिन, विजय थलापति की कैबिनेट में मिली जगह, 59 साल बाद सत्ता में होगी वापसी
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Vijay Thalapathy Cabinet Expansion: देश में अपनी जड़ों को फिर से तलाश रही इंडियन नेशनल कांग्रेस पार्टी के अच्छे दिन आ गए हैं. तमिलनाडू की राजनीति में छह दशकों के बाद कांग्रेस के लिए ऐसा ऐतिहासिक पल आया है. जब कांग्रेस के विधायक राज्य मंत्रिमंडल में शामिल होने जा रहे हैं. इतने लंबे अंतराल के बाद तमिलनाडु की सत्ता में कांग्रेस की वापसी कई मायनों में खास है. यह कांग्रेस के लिए तमिलनाडु में नए अध्याय की शुरुआत है. वर्ष 1967 के बाद पहली बार कांग्रेस के विधायक कैबिनेट का हिस्सा बनने जा रहे हैं. कांग्रेस ने इस दिन के लिए लगभग 59 साल इंतजार किया है. तमिलनाडु में कांग्रेस विधायक दल के नेता राजेश कुमार और एआईसीसी सचिव पी विश्वनाथन विजय सरकार में मंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं. कांग्रेस कार्यकर्ताओं का मानना है कि यह केवल सत्ता में भागीदारी नहीं बल्कि वर्षों के संघर्ष, धैर्य और राजनीतिक सम्मान की जीत है. राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह दक्षिण भारतीय राजनीति में गठबंधन मॉडल के नए दौर की शुरुआत मानी जा रही है. पिछले 6 दशकों में कांग्रेस ने कई क्षेत्रीय दलों का साथ दिया. डीएमके और एआईएडीएमके दोनों की सरकारों को कांग्रेस का समर्थन मिलता रहा. खासकर 2006 में डीएमके सरकार कांग्रेस के समर्थन से ही स्थिर रह सकी. 2009 में वाम दलों और पीएमके के गठबंधन छोड़ने के बाद भी कांग्रेस सरकार के साथ मजबूती से खड़ी रही. इसके बावजूद कांग्रेस को कभी सत्ता में वास्तविक हिस्सेदारी नहीं मिली. कांग्रेस नेता राहुल गांधी लगातार गठबंधन राजनीति में सम्मान, साझेदारी और सहयोग की बात करते रहे हैं. दिसंबर 2025 में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के प्रभारी गिरिश ने इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए गठबंधन सरकार और सत्ता में भागीदारी का प्रस्ताव रखा था. हालांकि डीएमके नेतृत्व ने उस विचार को सिरे से खारिज कर दिया. ऐसे समय में टीवीके प्रमुख विजय ने खुलकर गठबंधन सरकार और सहयोगी दलों के सम्मान की बात की. जनता ने भी एकदलीय राजनीति से अलग सोच को समर्थन दिया और विजय के नेतृत्व वाले गठबंधन को सत्ता सौंपी. हालांकि विजय थलापति की सरकार में इस बार कांग्रेस को उसक हक मिल रहा है.करीब छह दशक बाद अब खादी पहनने वाले कांग्रेस नेता फिर से तमिलनाडु मंत्रिमंडल की मेज पर बैठेंगे. इसे केवल राजनीतिक घटना नहीं बल्कि कांग्रेस की वैचारिक और भावनात्मक वापसी के रूप में देखा जा रहा है. इस पूरे घटनाक्रम को कांग्रेस के लिए और भावुक बनाने वाली बात यह है कि कांग्रेस मंत्री जिस दिन शपथ ले रहे हैं, उसी दिन पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पुण्यतिथि भी है. राजीव गांधी ने ही कभी तमिलनाडु में “कामराज शासन” की वापसी का नारा दिया था. 1967 में कांग्रेस के जिन नेताओं ने अंतिम बार तमिलनाडु मंत्रिमंडल में मंत्री पद संभाला था, उनमें ज्योति वेंकटाचलम, आर. वेंकटरमन, पी. कक्कन, वी. रामैया, एन. नल्लासेनापति और एस.एम. अब्दुल मजीद जैसे नाम शामिल थे. इसके बाद राज्य की राजनीति पूरी तरह बदल गई और कांग्रेस लंबे समय तक सत्ता से दूर रही.
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