उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों की आत्महत्या: शिक्षा मंत्रालय की भूमिका
जागरण संपादकीय: छात्रों की आत्महत्याएं
Jagran
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उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों की आत्महत्या की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताते हुए, शिक्षा मंत्रालय को सभी संस्थानों को काउंसिलिंग और मानक संचालन प्रक्रिया का पालन करने के लिए सतर्क करना चाहिए। आईआईटी खड़गपुर और एनआईटी कुरुक्षेत्र में हाल की आत्महत्याएं इस समस्या की गंभीरता को दर्शाती हैं।
- 01उच्च शिक्षा संस्थानों में आत्महत्या की घटनाएं बढ़ रही हैं।
- 02शिक्षा मंत्रालय को काउंसिलिंग तंत्र को मजबूत करने की आवश्यकता है।
- 03आईआईटी खड़गपुर में पिछले डेढ़ वर्ष में नौ छात्रों ने आत्महत्या की।
- 04एनआईटी कुरुक्षेत्र में हाल ही में चार छात्रों ने आत्महत्या की।
- 05छात्रों की मानसिक स्वास्थ्य की निरंतर जांच जरूरी है।
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उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों की आत्महत्या की घटनाएं चिंताजनक स्तर पर पहुंच गई हैं। हाल ही में आईआईटी खड़गपुर में नौ छात्रों और एनआईटी कुरुक्षेत्र में चार छात्रों की आत्महत्या ने इस समस्या की गंभीरता को उजागर किया है। शिक्षा मंत्रालय को सभी संस्थानों को काउंसिलिंग के लिए सतर्क करते हुए यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके पास पर्याप्त संसाधन और संवेदनशीलता हो। छात्रों की आत्महत्या के पीछे कई कारण हैं, जैसे परीक्षा में असफलता, सामाजिक भेदभाव, और मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं। इसलिए, संस्थानों को छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य की निरंतर जांच और काउंसिलिंग तंत्र को मजबूत करने की आवश्यकता है।
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यह स्थिति छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और उनके शैक्षणिक जीवन पर गंभीर प्रभाव डाल रही है।
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