भारत में शिक्षकों के रिक्त पदों की गंभीर समस्या
संपादकीय: शिक्षकों के बिना शिक्षा, करीब दस लाख पद खाली
Jagran
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भारत में राज्यों में शिक्षकों के करीब दस लाख पद खाली हैं, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। शिक्षा मंत्रालय की संसदीय समिति ने रिक्त पदों को भरने में देरी करने वाले राज्यों की वित्तीय मदद रोकने का सुझाव दिया है।
- 01शिक्षकों के करीब दस लाख पद खाली हैं, जिनमें से साढ़े सात लाख प्राथमिक शिक्षकों के हैं।
- 02पिछले वर्ष भी शिक्षकों के रिक्त पदों पर चिंता जताई गई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
- 03शिक्षा मंत्रालय ने राज्यों से रिक्त पदों को प्राथमिकता से भरने का आग्रह किया है।
- 04उत्तर प्रदेश में 2.17 लाख, बिहार में 1.92 लाख और झारखंड में 72 हजार शिक्षकों के पद खाली हैं।
- 05शिक्षकों के रिक्त पदों को भरने में देरी, देश की भावी पीढ़ी के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
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भारत में शिक्षकों के करीब दस लाख पद खाली हैं, जो शिक्षा की बुनियाद को कमजोर कर रहे हैं। शिक्षा मंत्रालय की संसदीय समिति ने इस गंभीर स्थिति पर चिंता जताते हुए राज्यों को चेतावनी दी है कि यदि वे शिक्षकों के रिक्त पद नहीं भरते हैं, तो उन्हें समग्र शिक्षा अभियान के तहत वित्तीय मदद नहीं दी जाएगी। पिछले वर्ष भी इस मुद्दे पर ध्यान दिया गया था, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उत्तर प्रदेश में 2.17 लाख, बिहार में 1.92 लाख, झारखंड में 72 हजार, और मध्य प्रदेश एवं पश्चिम बंगाल में 55-55 हजार पद खाली हैं। यह स्थिति दर्शाती है कि राज्य सरकारें स्कूली शिक्षा की दशा सुधारने के प्रति गंभीर नहीं हैं, जिससे छात्रों की शिक्षा पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
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शिक्षकों के रिक्त पदों की समस्या से छात्रों की शिक्षा प्रभावित हो रही है, जिससे उनकी भविष्य की संभावनाएं कम हो रही हैं।
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