बेंगलुरु की स्टार्टअप डॉगनोसिस: कुत्तों और एआई से कैंसर का पता लगाने की नई तकनीक
कुत्तों और एआई का उपयोग कर कैंसर का पता लगा रही बेंगलुरु की कंपनी

Image: Rudrakshnews
बेंगलुरु की स्टार्टअप डॉगनोसिस कुत्तों की सूंघने की क्षमता और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग कर कैंसर का प्रारंभिक पता लगाने में मदद कर रही है। इस तकनीक ने 90% सटीकता से कैंसर के लक्षणों की पहचान की है, जिससे सस्ती और दर्दरहित जांच संभव हो रही है।
- 01डॉगनोसिस ने पिछले दो वर्षों में 1,500 लोगों पर कैंसर पहचान के परीक्षण किए हैं।
- 02कंपनी की तकनीक 90% से अधिक सटीकता के साथ कैंसर के शुरुआती लक्षणों को पकड़ने में सफल रही है।
- 03मरीजों को विशेष मास्क में 10 मिनट तक सांस लेने को कहा जाता है, जिससे वाष्पशील कार्बनिक यौगिक इकट्ठा होते हैं।
- 04प्रशिक्षित कुत्ते इन नमूनों को सूंघते हैं और एआई-आधारित एल्गोरिदम से उनके संकेतों का विश्लेषण किया जाता है।
- 05विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक भारत में कैंसर के शीघ्र पहचान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
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बेंगलुरु की स्टार्टअप डॉगनोसिस कुत्तों की अद्भुत सूंघने की क्षमता और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का उपयोग कर कैंसर का प्रारंभिक पता लगाने की दिशा में काम कर रही है। इस तकनीक ने पिछले दो वर्षों में 1,500 लोगों पर परीक्षण किए हैं, जिसमें 90% से अधिक सटीकता से कैंसर के लक्षणों की पहचान की गई है। मरीजों को विशेष रूप से डिजाइन किए गए मास्क में 10 मिनट तक सांस लेने के लिए कहा जाता है, जिससे उनकी सांस में मौजूद वाष्पशील कार्बनिक यौगिक (वीओसी) इकट्ठा होते हैं। इन नमूनों का परीक्षण प्रशिक्षित कुत्तों द्वारा किया जाता है, जो एआई-संचालित विश्लेषण के माध्यम से कैंसर से जुड़े रासायनिक यौगिकों की पहचान करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक भारत में कैंसर की पहचान में महत्वपूर्ण सुधार ला सकती है और वैश्विक स्तर पर भी योगदान दे सकती है।
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यह तकनीक कैंसर की पहचान को सस्ता और दर्दरहित बना सकती है, जिससे अधिक लोगों को समय पर उपचार मिल सकेगा।
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