भारत, रूस और चीन का नया गठबंधन: क्या RIC वैश्विक शक्ति संतुलन को बदल सकता है?
अमेरिकी दादागिरी खत्म, अब राज करेगा भारत-रूस और चीन वाला RIC, पुतिन के गुरु की भविष्यवाणी में कितना दम?
Image: Nbt Navbharattimes
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के राजनीतिक गुरु एलेक्जेंडर डुगिन के अनुसार, यदि भारत रूस और चीन के साथ मिलकर एक ध्रुव बनाता है, तो यह अमेरिका के प्रभाव को चुनौती दे सकता है। वैश्विक राजनीति में बदलाव के इस दौर में, भारत की स्वतंत्र विदेश नीति इसे चौथे ध्रुव के रूप में उभरने का अवसर दे सकती है।
- 01एलेक्जेंडर डुगिन ने कहा कि यदि भारत रूस और चीन के साथ जुड़ता है, तो दुनिया में चार ध्रुव होंगे।
- 02पश्चिमी शक्तियों का प्रभाव पिछले 20 वर्षों में तेजी से घटा है, जबकि रूस और चीन खुलकर चुनौती दे रहे हैं।
- 03भारत ने कभी भी क्वाड को सैन्य गठबंधन नहीं माना, और उसकी विदेश नीति गुटनिरपेक्ष रही है।
- 04भारत की विशाल जनसंख्या और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था उसे वैश्विक व्यवस्था में महत्वपूर्ण बना सकती है।
- 05अमेरिका अब भी सबसे बड़ी सैन्य और आर्थिक शक्ति है, लेकिन उसका निर्विवाद प्रभाव कम हो रहा है।
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रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के राजनीतिक गुरु एलेक्जेंडर डुगिन ने हाल ही में कहा कि यदि भारत रूस और चीन के साथ मिलकर एक ध्रुव बनाता है, तो यह अमेरिका के वैश्विक प्रभुत्व को चुनौती दे सकता है। उन्होंने कहा कि पश्चिमी शक्तियों का प्रभाव अब पहले जैसा नहीं रहा है, और रूस और चीन खुलकर अमेरिका के नेतृत्व वाली व्यवस्था को चुनौती दे रहे हैं। भारत की स्थिति इस संदर्भ में महत्वपूर्ण है, क्योंकि वह अपने ऐतिहासिक संबंधों को बनाए रखते हुए स्वतंत्र विदेश नीति अपनाने की कोशिश कर रहा है। भारत ने कभी भी क्वाड को एक सैन्य गठबंधन के रूप में नहीं माना है, और उसकी गुटनिरपेक्ष नीति उसे वैश्विक शक्तियों के बीच संतुलन बनाने में मदद कर सकती है। हालांकि, अमेरिका अब भी सबसे बड़ी सैन्य और आर्थिक शक्ति बना हुआ है, लेकिन उसकी शक्ति की चमक फीकी पड़ रही है। भारत को अपनी अर्थव्यवस्था और सैन्य शक्ति को मजबूत करने की आवश्यकता है ताकि वह चौथे ध्रुव के रूप में उभर सके।
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भारत की विदेश नीति और वैश्विक स्थिति का विकास भारतीय नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह उनकी सुरक्षा और आर्थिक अवसरों को प्रभावित कर सकता है।
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