उत्तराखंड में नकली दवाओं के नेटवर्क का भंडाफोड़
उत्तराखंड में धड़ल्ले से चल रही ‘मौत की फैक्ट्री’, नकली दवाओं के बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़
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उत्तराखंड में नकली दवाओं का बड़ा नेटवर्क सक्रिय है, जहां गंभीर बीमारियों की दवाएं तैयार कर देशभर में बेची जा रही हैं। एसटीएफ ने हाल ही में इस नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है, जिससे सरकारी निगरानी पर सवाल उठ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की निष्क्रियता के कारण मरीजों की सेहत पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
- 01एसटीएफ ने फेसबुक के माध्यम से नकली दवाओं का कारोबार करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया है।
- 02नकली दवाएं रुड़की, भगवानपुर और कोटद्वार की फैक्ट्रियों में तैयार की जा रही थीं।
- 03इन दवाओं में कैंसर, ब्लड प्रेशर और मिर्गी जैसी गंभीर बीमारियों की दवाएं शामिल थीं।
- 04सरकार ने उत्तराखंड को फार्मा हब बनाने के लिए उद्योगों को कई सुविधाएं दी थीं, जिससे नकली दवा सिंडिकेट पनप गया।
- 05विशेषज्ञों का मानना है कि नकली दवा का कारोबार सुनियोजित 'साइलेंट किलिंग' है, और सिस्टम की सर्जरी की आवश्यकता है।
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उत्तराखंड में नकली दवाओं का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है, जहां कैंसर, ब्लड प्रेशर, और मिर्गी जैसी गंभीर बीमारियों की दवाएं तैयार की जा रही हैं। हाल ही में एसटीएफ ने इस नेटवर्क का भंडाफोड़ किया, जिसमें रुड़की, भगवानपुर और कोटद्वार की फैक्ट्रियों से नकली दवाएं बरामद की गईं। ये दवाएं बिहार, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पंजाब और चंडीगढ़ जैसे राज्यों में सप्लाई की जा रही थीं। गिरोह ने फेसबुक पर 'एसके हेल्थ केयर' नाम से पेज बनाकर ब्रांडेड दवाओं की तस्वीरें साझा कीं और उन्हें आधे दाम पर बेचा। विशेषज्ञों का कहना है कि यह नकली दवा का कारोबार केवल आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि एक सुनियोजित 'साइलेंट किलिंग' है। स्वास्थ्य विभाग की निष्क्रियता और नियमित निरीक्षण की कमी ने इस समस्या को और बढ़ा दिया है। अब आवश्यक है कि राज्यभर की फार्मा यूनिट्स का विशेष आडिट किया जाए और ड्रग इंस्पेक्टरों की जवाबदेही तय की जाए।
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नकली दवाओं के कारोबार से मरीजों की सेहत पर गंभीर खतरा है, जिससे समाज में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है।
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