उत्तर प्रदेश में मातृ मृत्यु दर में वृद्धि पर सरकार की चिंता
यूपी सरकार को लगा बड़ा झटका, घटने की जगह अचानक बढ़ गई मातृ मृत्यु दर

Image: Jagran
उत्तर प्रदेश में मातृ मृत्यु दर में वृद्धि हुई है, जो प्रति एक लाख जीवित जन्मों पर 154 हो गई है। यह आंकड़ा भारत में सबसे अधिक है, जिससे राज्य सरकार को चिंता का सामना करना पड़ रहा है। राज्य परिवर्तन आयोग ने स्वास्थ्य विभाग को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
- 01मातृ मृत्यु अनुपात 141 से बढ़कर 154 हो गया है, जो देश में सबसे अधिक है।
- 02राज्य परिवर्तन आयोग ने अपर मुख्य सचिव को तत्काल प्रभावी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
- 03स्वास्थ्य विभाग और बाल विकास विभाग द्वारा कई योजनाएं संचालित होने के बावजूद मातृ मृत्यु दर बढ़ी है।
- 04मुख्यमंत्री ने मातृ मृत्यु को शून्य करने के लिए रोडमैप पर सहमति दी है।
- 05उत्तर प्रदेश के साथ-साथ अन्य राज्यों को भी उच्च मातृ मृत्यु दर वाले राज्यों की श्रेणी में रखा गया है।
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उत्तर प्रदेश में मातृ मृत्यु दर में अचानक वृद्धि हुई है, जो प्रति एक लाख जीवित जन्मों पर 154 हो गई है। यह आंकड़ा भारत में सबसे अधिक है और स्वास्थ्य विभाग की प्रयासों के बावजूद यह चिंता का विषय बन गया है। भारत के रजिस्ट्रार जनरल द्वारा किए गए सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (एसआरएस) सर्वे में यह वृद्धि दर्ज की गई है। राज्य परिवर्तन आयोग (एसटीसी) ने इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए अपर मुख्य सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य को तत्काल प्रभावी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। एसटीसी के सीईओ मनोज कुमार सिंह ने पत्र में बताया कि मातृ मृत्यु दर में वृद्धि के कारणों का विश्लेषण किया जाएगा। इसके अलावा, मुख्यमंत्री ने मातृ मृत्यु को शून्य करने के लिए एक रोडमैप पर सहमति दी है, जिसमें गर्भवती महिलाओं की देखभाल के लिए विभिन्न उपाय शामिल हैं। इस रोडमैप के तहत नेशनल हेल्थ मिशन और राज्य परिवर्तन आयोग में समर्पित वार रूम स्थापित किए जाएंगे।
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यह वृद्धि गर्भवती महिलाओं और उनके परिवारों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में कमी को दर्शाती है, जिससे उनकी सुरक्षा पर खतरा मंडरा रहा है।
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