हीटवेव के प्रभाव और जन स्वास्थ्य पर डॉ. मावलंकर की चेतावनी
मौत के आंकड़ों का तुलनात्मक अध्ययन नहीं हो रहा, इसलिए हीटवेव की भयावहता सामने नहीं आ रही: डॉ. मावलंकर

Image: Jagran
भारत में गर्मी की स्थिति 'अनएस्केपेबल' हो गई है, जिसमें 36 में से 35 राज्यों में तापमान 45-48 डिग्री सेल्सियस के बीच है। डॉ. दिलीप मावलंकर का कहना है कि हीटवेव की गंभीरता का आकलन करने के लिए मौतों के आंकड़ों का तुलनात्मक अध्ययन आवश्यक है, ताकि जन स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाया जा सके।
- 01डॉ. दिलीप मावलंकर ने 2010 में अहमदाबाद में हीटवेव के प्रभावों पर शोध शुरू किया था, जिससे 800 मौतें रिकॉर्ड की गईं।
- 02अहमदाबाद का हीटवेव एक्शन प्लान लागू करने के बाद, मौतों में 40 प्रतिशत की कमी आई।
- 03भारत में हीटवेव की आवृत्ति 1961 से हर दशक 0.1 दिन बढ़ रही है।
- 04डब्ल्यूएचओ की गाइडलाइंस के अनुसार, घर के भीतर का तापमान 24 डिग्री सेल्सियस से ऊपर नहीं होना चाहिए।
- 05डॉ. मावलंकर ने सुझाव दिया कि सरकारों को जन जागरूकता के लिए बजट आवंटित करना चाहिए।
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भारत में गर्मी की स्थिति अब 'अनएस्केपेबल' हो गई है, जिसमें कई राज्यों में तापमान 45 से 48 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है। जलवायु परिवर्तन के कारण हीटवेव की आवृत्ति बढ़ रही है, जिससे जन स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। डॉ. दिलीप मावलंकर, जो पहले अहमदाबाद के हीटवेव एक्शन प्लान के प्रमुख थे, का कहना है कि मौतों के आंकड़ों का तुलनात्मक अध्ययन आवश्यक है। उन्होंने बताया कि 2010 में अहमदाबाद में हीटवेव के दौरान 800 मौतें हुई थीं, जो शोध के माध्यम से प्रमाणित हुईं। इसके बाद, अहमदाबाद में लागू किए गए हीटवेव एक्शन प्लान के परिणामस्वरूप मौतों में 40 प्रतिशत की कमी आई। डॉ. मावलंकर ने यह भी बताया कि भारत में हीटवेव की आवृत्ति हर दशक बढ़ रही है, और डब्ल्यूएचओ की गाइडलाइंस के अनुसार, घर के भीतर का तापमान 24 डिग्री सेल्सियस से ऊपर नहीं होना चाहिए। उन्होंने सरकारों से जन जागरूकता बढ़ाने और स्वास्थ्य सेवाओं को सुधारने की अपील की।
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हीटवेव के बढ़ते प्रभाव से जन स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर दबाव पड़ रहा है, जिससे असामयिक मौतों की संभावना बढ़ रही है।
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