सुप्रीम कोर्ट का फैसला: समझौते के बाद लोन डिफॉल्टर पर नहीं चलेगा आपराधिक केस
'समझौते के बाद नहीं चलाया जा सकता क्रिमिनल केस', लोन डिफॉल्टरों पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि यदि बैंक और कर्जदार के बीच लोन निपटारे के लिए समझौता हो जाता है, तो उसके बाद आपराधिक कार्यवाही नहीं की जा सकती। यह निर्णय अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक प्रभाव डालेगा और अदालत ने मामले को रद कर दिया।
- 01सुप्रीम कोर्ट ने लोन डिफॉल्टर के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही को रोकने का फैसला किया।
- 02बिजनेसमैन ने बैंक के साथ 6.49 करोड़ रुपये के बकाया में से 4.25 करोड़ रुपये का भुगतान किया।
- 03अदालत ने कहा कि समझौते के बाद आपराधिक केस चलाना अदालती प्रक्रिया का दुरुपयोग है।
- 04बैंक ने दो साल बाद धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया, जिसे कोर्ट ने रद कर दिया।
- 05अदालत ने चेतावनी दी कि आपराधिक कार्रवाई से अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
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सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि यदि बैंक और कर्जदार के बीच लोन खाते के निपटारे के लिए समझौता हो जाता है, तो उसके बाद लोन डिफॉल्टर के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही नहीं की जा सकती। जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की बेंच ने एक बिजनेसमैन की याचिका को स्वीकार करते हुए उसके खिलाफ चल रहे आपराधिक मामले को रद कर दिया। इस मामले में बिजनेसमैन ने डेब्ट रिकवरी ट्रिब्यूनल (DRT) के सामने बैंक के साथ समझौता किया था, जिसमें उसने 6.49 करोड़ रुपये के बकाया में से 4.25 करोड़ रुपये का भुगतान किया। अदालत ने कहा कि जब दोनों पक्ष आपसी समझौते से विवाद सुलझा लेते हैं, तो आपराधिक केस चलाना अदालती प्रक्रिया का दुरुपयोग है। अदालत ने चेतावनी दी कि यदि समझौते के बाद भी आपराधिक कार्रवाई की अनुमति दी गई तो इससे व्यावसायिक संस्थाएं बैंकिंग विवादों के समाधान से हिचकिचाएंगी, जो अर्थव्यवस्था पर बुरा प्रभाव डालेगा।
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यह निर्णय व्यवसायों को बैंकिंग विवादों के समाधान में प्रोत्साहित करेगा।
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