भारतीय सेना का हाई एल्टीट्यूड लॉजिस्टिक ड्रोन: दुर्गम इलाकों में आपूर्ति का नया साधन
दुर्गम पहाड़ों में सेना की नई ताकत: हाई एल्टीट्यूड लॉजिस्टिक ड्रोन बना गेम चेंजर; कैसे बदल रहे हालात?
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भारतीय सेना ने हाई एल्टीट्यूड लॉजिस्टिक ड्रोन को शामिल किया है, जो दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में आवश्यक सामग्री की आपूर्ति में मदद करेगा। इसकी 20 किलोग्राम पेलोड क्षमता और 5 किलोमीटर तक की उड़ान इसे विशेष रूप से उपयोगी बनाती है।
- 01हाई एल्टीट्यूड लॉजिस्टिक ड्रोन की पेलोड क्षमता 20 किलोग्राम है।
- 02यह ड्रोन एक बार चार्ज होने पर 30 मिनट तक उड़ान भर सकता है।
- 03ड्रोन का उपयोग जम्मू-कश्मीर के दुर्गम क्षेत्रों में सैनिकों तक सामग्री पहुंचाने के लिए किया जा रहा है।
- 04यह तकनीक आपदा प्रबंधन में भी मददगार साबित हो रही है।
- 05हाल के प्राकृतिक आपदाओं ने ऐसे लॉजिस्टिक ड्रोन की आवश्यकता को बढ़ा दिया है।
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भारतीय सेना ने अपने बेड़े में हाई एल्टीट्यूड लॉजिस्टिक ड्रोन को शामिल किया है, जो दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में आवश्यक सामग्री की आपूर्ति में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यह ड्रोन हैक्सा कॉप्टर डिजाइन में है और इसकी पेलोड क्षमता 20 किलोग्राम है, जिससे यह हथियार, गोला-बारूद, खाद्य सामग्री और दवाइयां एक बार में अग्रिम मोर्चों तक पहुंचा सकता है। इसकी उड़ान अवधि 30 मिनट है और यह एक मिशन में लगभग 5 किलोमीटर की दूरी तय कर सकता है। यह ड्रोन विशेष रूप से जम्मू-कश्मीर के कठिन भूभाग में तैनात जवानों के लिए उपयोगी है। इसके अलावा, प्राकृतिक आपदाओं जैसे बाढ़ और भूस्खलन के दौरान राहत सामग्री पहुंचाने में भी इसका उपयोग हो रहा है। इस प्रकार, हाई एल्टीट्यूड लॉजिस्टिक ड्रोन भारतीय सेना की परिचालन क्षमता को बढ़ाने के साथ-साथ आपदा राहत कार्यों में भी नई संभावनाएं खोल रहा है।
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हाई एल्टीट्यूड लॉजिस्टिक ड्रोन दुर्गम क्षेत्रों में सैनिकों तक आवश्यक सामग्री की आपूर्ति को सरल बनाता है।
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