भारत की सैन्य ड्रोन खरीद: पूर्व आर्मी चीफ जनरल नरवणे का दृष्टिकोण
ड्रोन की बंपर खरीद क्यों कर रहा भारत? UAV सेना के लिए कितने जरूरी, पूर्व आर्मी चीफ जनरल नरवणे ने बताया सब कुछ
Image: Nbt Navbharattimes
भारत इस वर्ष घरेलू निर्माताओं से 2 अरब डॉलर के सैन्य ड्रोन खरीदने की योजना बना रहा है। पूर्व आर्मी चीफ जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने बताया कि आधुनिक युद्धों में ड्रोन की अहमियत बढ़ गई है, जिससे भारत को अपनी सैन्य क्षमताओं को मजबूत करने की आवश्यकता है।
- 01भारत इस साल 2 अरब डॉलर से अधिक के सैन्य ड्रोन खरीदने की योजना बना रहा है।
- 02पूर्व आर्मी चीफ जनरल मनोज मुकुंद नरवणे के अनुसार, ड्रोन आधुनिक युद्धों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
- 03भारतीय सशस्त्र बलों ने सेना, नौसेना और वायु सेना के लिए ड्रोन खरीदने पर ध्यान केंद्रित किया है।
- 04ड्रोन की खरीद का उद्देश्य सैन्य आधुनिकीकरण और परिचालन तत्परता को बढ़ाना है।
- 05इस खरीद से घरेलू कंपनियों और MSMEs को भी लाभ होगा।
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भारत इस साल घरेलू निर्माताओं से 2 अरब डॉलर से अधिक के सैन्य ड्रोन खरीदने की योजना बना रहा है, जो कि अब तक की सबसे बड़ी ड्रोन खरीद होगी। पूर्व आर्मी चीफ जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने बताया कि आधुनिक युद्धों में ड्रोन का उपयोग बढ़ा है, जैसे कि रूस-यूक्रेन और ईरान-इजरायल के संघर्षों में। उन्होंने कहा कि ड्रोन केवल क्वाडकॉप्टर नहीं हैं, बल्कि ये बिना पायलट वाले हवाई वाहनों (UAVs) के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। भारतीय सशस्त्र बलों ने तीनों सेनाओं के लिए ड्रोन खरीदने पर ध्यान केंद्रित किया है, जिससे देश की सैन्य क्षमताओं को मजबूत किया जा सके। इस खरीद के माध्यम से, भारत घरेलू कंपनियों और MSMEs को भी शामिल कर रहा है, जिससे ड्रोन के उत्पादन में वृद्धि होगी।
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इस ड्रोन खरीद से भारत की सैन्य क्षमताओं में सुधार होगा और घरेलू उद्योग को बढ़ावा मिलेगा।
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