भारत का नया 'जोरावर' टैंक: चीन के खिलाफ मजबूती और रूस के T-90 टैंकों की कमी
चीन के छक्के छुड़ाने आया मेड-इन-इंडिया 'जोरावर', ग्राहक को तरस रहे रूसी T-90 टैंक, भारत फिर बनेगा तारणहार?
Nbt NavbharattimesImage: Nbt Navbharattimes
भारत ने स्वदेशी 'जोरावर' लाइट टैंक विकसित किया है, जो चीन के टाइप 15 टैंकों का मुकाबला करेगा। इस टैंक का वजन 25 टन है और यह 105mm की राइफल्ड तोप से लैस है। दूसरी ओर, रूस अपने T-90 टैंकों के लिए नए ग्राहक खोज रहा है।
- 01जोरावर टैंक का विकास केवल 19 महीनों में हुआ और यह हिमालयी क्षेत्रों में लड़ाई के लिए डिजाइन किया गया है।
- 02इस टैंक का वजन 25 टन है और यह दुश्मन के बंकरों और सैन्य वाहनों को 2-3 किलोमीटर की दूरी से नष्ट कर सकता है।
- 03भारत ने पिछले महीने 1000वां T-90 टैंक बनाया है, जिससे उसकी रूस पर निर्भरता कम हुई है।
- 04जोरावर टैंक में 'सुसाइड ड्रोन' और आधुनिक तकनीक शामिल है, जो इसे दुश्मन के लिए कठिन लक्ष्य बनाती है।
- 05भारतीय सेना ने 59 इकाइयों के लिए जोरावर का प्रारंभिक ऑर्डर दिया है, जिसमें कुल 354 टैंक की आवश्यकता होगी।
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भारत ने स्वदेशी 'जोरावर' लाइट टैंक का विकास किया है, जो चीन के टाइप 15 टैंकों का मुकाबला करने के लिए तैयार किया गया है। इस टैंक को AM नाइक हेवी इंजीनियरिंग कॉम्प्लेक्स ने केवल 19 महीनों में तैयार किया है। जोरावर का वजन 25 टन है और यह 105mm की राइफल्ड तोप से लैस है, जो दुश्मन के बंकरों और सैन्य वाहनों को 2-3 किलोमीटर की दूरी से नष्ट कर सकती है। इसमें 'सुसाइड ड्रोन' और आधुनिक तकनीक भी शामिल है, जिससे यह दुश्मन के लिए कठिन लक्ष्य बन जाता है। दूसरी ओर, रूस अपने T-90 टैंकों के लिए नए ग्राहक खोज रहा है, जबकि भारत ने पिछले महीने 1000वां T-90 टैंक बनाया है। इससे भारत की रूस पर निर्भरता कम हुई है। भारतीय सेना ने जोरावर के लिए 59 इकाइयों का प्रारंभिक ऑर्डर दिया है, जिसमें कुल 354 टैंक की आवश्यकता होगी।
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जोरावर टैंक का विकास भारत की रक्षा क्षमताओं को बढ़ाएगा और चीन के खिलाफ रणनीतिक स्थिति मजबूत करेगा।
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