NIA कोर्ट ने PFI के 21 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए, शरिया राज की साजिश का खुलासा
'PFI भारत में शरिया राज स्थापित करना चाहता था', NIA कोर्ट ने 21 के खिलाफ आरोप किए तय

Image: India Tv
पटियाला हाउस कोर्ट की विशेष NIA अदालत ने पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) से जुड़े 21 आरोपियों, जिसमें PFI के चेयरमैन ओ. एम. ए. सलाम और वाइस चेयरमैन ई.एम. अबूबकर शामिल हैं, के खिलाफ आरोप तय किए हैं। आरोप है कि ये आरोपी भारत में शरिया कानून आधारित इस्लामिक खिलाफत स्थापित करने की साजिश में शामिल थे।
- 01NIA अदालत ने PFI के 21 आरोपियों के खिलाफ गंभीर आरोप तय किए हैं, जिनमें आतंकी साजिश शामिल है।
- 02कोर्ट ने कहा कि आरोपियों ने 2047 तक भारत में शरिया राज स्थापित करने की योजना बनाई थी।
- 03PFI के सदस्यों पर ISIS जैसे आतंकी संगठनों का समर्थन करने का आरोप है।
- 04इस मामले में अगली सुनवाई 10 जुलाई को होगी।
- 05PFI को 2022 में UAPA के तहत प्रतिबंधित किया गया था।
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पटियाला हाउस कोर्ट की विशेष NIA अदालत ने पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) से जुड़े 21 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए हैं, जिनमें PFI के चेयरमैन ओ. एम. ए. सलाम और वाइस चेयरमैन ई.एम. अबूबकर शामिल हैं। अदालत ने कहा कि इन आरोपियों ने भारत की लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष सरकार को उखाड़ फेंकने की साजिश की थी। आरोप है कि PFI ने 2047 तक भारत में शरिया कानून आधारित इस्लामिक खिलाफत स्थापित करने की योजना बनाई थी, जिसे सशस्त्र संघर्ष के जरिए पूरा किया जाना था। अदालत ने यह भी बताया कि 'विजन 2047' नाम का दस्तावेज PFI का था, जिसमें हिंदू नेताओं को निशाना बनाने और ISIS जैसे आतंकी संगठनों का समर्थन करने के निर्णय शामिल थे। इस मामले में अगली सुनवाई 10 जुलाई को होगी, जिसमें सभी आरोपियों को अदालत में पेश किया जाएगा। PFI एक विवादित संगठन है, जिसे 2022 में UAPA के तहत बैन किया गया था।
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इस फैसले से PFI के सदस्यों और समर्थकों पर गंभीर कानूनी कार्रवाई की जाएगी, जिससे संगठन की गतिविधियों पर प्रभाव पड़ेगा।
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