भारत में कोल गैसीफिकेशन योजना: ऊर्जा सुरक्षा और आयात में कमी का लक्ष्य
कोल गैसीफिकेशन क्या है? कैसे कोयला बनता है ‘सिनगैस’, और क्यों इस पर दांव लगा रही सरकार
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केंद्र सरकार ने कोयला और लिग्नाइट गैसीफिकेशन को बढ़ावा देने के लिए 37,500 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी है। इस पहल से 75 मिलियन टन कोयले का गैसीफिकेशन किया जाएगा, जिससे आयात पर निर्भरता कम होगी और लगभग 50,000 रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
- 01सरकार ने कोल गैसीफिकेशन के लिए 37,500 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी है।
- 02इस योजना से 75 मिलियन टन कोयले का गैसीफिकेशन किया जाएगा।
- 03गैसीफिकेशन से 50,000 नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
- 04भारत में कोयले का भंडार 401 अरब टन है, जो ऊर्जा सुरक्षा में मदद करेगा।
- 05सरकार का लक्ष्य अगले 4-5 सालों में गैस उत्पादन शुरू करना है।
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केंद्र सरकार ने कोयला और लिग्नाइट गैसीफिकेशन को बढ़ावा देने के लिए 37,500 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य स्वच्छ कोयला उपयोग, ऊर्जा सुरक्षा और आयात पर निर्भरता कम करना है। सरकार का लक्ष्य 75 मिलियन टन कोयले का गैसीफिकेशन करना है, जिससे 3 लाख करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित होने की उम्मीद है। कोल गैसीफिकेशन एक रासायनिक प्रक्रिया है, जिसमें कोयले को जलाने के बजाय उसे 'सिनगैस' में बदला जाता है, जिसका उपयोग बिजली उत्पादन, उर्वरक, रसायन उद्योग और सिंथेटिक ईंधन में किया जा सकता है। इस प्रक्रिया से भारत की एलएनजी आवश्यकता का लगभग 50% और अन्य रसायनों का आयात कम होगा। हालांकि, गैसीफिकेशन प्लांट लगाने में भारी लागत और जटिलता की चुनौतियां भी हैं।
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इस योजना से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और आयात पर निर्भरता कम होगी, जिससे देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
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