चीन की अदालत ने AI के नाम पर नौकरी से निकालने पर लगाई रोक
AI के नाम पर कंपनियां लोगों को जॉब से नहीं निकाल सकतीं: चीनी कोर्ट
Aaj Tak
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चीन की हांगझोउ शहर की अदालत ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के कारण किसी कर्मचारी को नौकरी से नहीं निकाला जा सकता है। यह फैसला टेक कंपनियों के लिए एक नया दिशा-निर्देश है, जो AI के उपयोग के चलते कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है।
- 01चीन की अदालत ने AI के कारण नौकरी से निकालने को गलत ठहराया।
- 02कंपनियों को लेबर कानूनों का पालन करना होगा।
- 03कर्मचारियों को उचित सैलरी और शर्तें दी जानी चाहिए।
- 04टेक्नोलॉजी में बदलाव से कर्मचारियों के अधिकार नहीं खत्म होते।
- 05यह फैसला अन्य देशों में भी प्रभाव डाल सकता है।
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चीन की हांगझोउ शहर की अदालत ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है, जिसमें कहा गया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के कारण किसी कर्मचारी को नौकरी से नहीं निकाला जा सकता है। मामले की शुरुआत एक कर्मचारी के खिलाफ कंपनी द्वारा की गई कार्रवाई से हुई, जब उसके काम में AI टूल्स की वजह से कमी आई। कंपनी ने उसे कम सैलरी पर दूसरी पोस्ट ऑफर की, जिसे उसने ठुकरा दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि टेक्नोलॉजी में बदलाव कंपनी का अधिकार है, लेकिन कर्मचारियों के अधिकारों का उल्लंघन नहीं किया जा सकता। अगर कंपनी AI का उपयोग कर रही है, तो उसे लेबर कानूनों का पालन करना होगा और कर्मचारियों के साथ उचित व्यवहार करना होगा। यह फैसला न केवल चीन में बल्कि वैश्विक स्तर पर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि कई बड़ी टेक कंपनियां AI के उपयोग के चलते कर्मचारियों की संख्या घटा रही हैं। इस फैसले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि टेक्नोलॉजी की दौड़ में मानव अधिकारों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
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इस फैसले का मतलब है कि चीन में कर्मचारियों को AI के कारण नौकरी से नहीं निकाला जा सकता, जिससे उनकी सुरक्षा सुनिश्चित होती है।
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