कुपोषण की समस्या: युवाओं में पतले होने की होड़ से बढ़ रहा है गंभीर एनीमिया
Kanpur: दुबलेपन की दीवानगी में गले पड़ा कुपोषण, हर महीने 200 युवतियां पहुंच रहीं हैलट, डॉक्टरों ने दी ये सलाह
Amar Ujala
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कानपुर, उत्तर प्रदेश में, युवाओं के बीच पतले होने की प्रवृत्ति के कारण कुपोषण और गंभीर एनीमिया की समस्या बढ़ रही है। डॉक्टरों का कहना है कि क्रैश डाइटिंग से शरीर में आवश्यक तत्वों की कमी हो रही है, जिससे स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
- 01पतला होना और फिट होना अलग हैं; पतले होने की होड़ में युवा क्रैश डाइट अपना रहे हैं।
- 02कम कैलोरी लेने से शरीर में आवश्यक तत्वों की कमी हो रही है।
- 03महिलाओं में हीमोग्लोबिन स्तर में गिरावट आ रही है, जो गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है।
- 04संतुलित आहार अपनाने की सलाह दी जा रही है।
- 05डॉक्टरों ने बिना विशेषज्ञ की सलाह के डाइटिंग न करने की चेतावनी दी है।
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कानपुर, उत्तर प्रदेश में, युवाओं के बीच पतले होने की प्रवृत्ति ने कुपोषण और गंभीर एनीमिया की समस्या को जन्म दिया है। डॉक्टर विशाल गुप्ता के अनुसार, युवा तेजी से क्रैश डाइटिंग की ओर बढ़ रहे हैं, जिससे उनकी कैलोरी की मात्रा अत्यधिक कम हो रही है। एक स्वस्थ व्यक्ति को प्रतिदिन 1500 से 1800 किलो कैलोरी लेनी चाहिए, जबकि कई युवा केवल 600 से 800 कैलोरी का सेवन कर रहे हैं। इस कमी के कारण मांसपेशियों में कमजोरी और चिड़चिड़ापन जैसे लक्षण देखे जा रहे हैं। हैलट जच्चा-बच्चा अस्पताल की डॉक्टर उरूज जहां ने बताया कि महिलाएं पतले होने के लिए भोजन छोड़ रही हैं, जिससे उनका हीमोग्लोबिन स्तर 7 तक गिर रहा है। यह भविष्य में बांझपन और हड्डियों के खोखलेपन जैसी गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है। डॉक्टरों ने संतुलित आहार अपनाने और बिना विशेषज्ञ की सलाह के डाइटिंग से बचने की सलाह दी है।
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यदि युवा संतुलित आहार नहीं अपनाते हैं, तो इससे उनकी स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ सकती हैं, जो भविष्य में गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती हैं।
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