उत्तर प्रदेश में सरकारी डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर कड़ी नजर
UP: सरकारी डॉक्टर हो जाएं सावधान, प्राइवेट क्लीनिक चलाते हैं तो बंद कर दें; खुफिया तरीके से रखी जाएगी नजर
Amar Ujala
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उत्तर प्रदेश में सरकारी डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर रोक लगाने के लिए एक समिति गठित की गई है। इस समिति के माध्यम से शिकायतों की जांच की जाएगी और सरकारी डॉक्टरों की गतिविधियों पर खुफिया नजर रखी जाएगी। यह कदम सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को बनाए रखने के लिए उठाया गया है।
- 01डीएम मनीष बंसल ने सरकारी डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर रोक के लिए समिति बनाई।
- 02खुफिया विभाग डॉक्टरों की गतिविधियों पर निगरानी रखेगा।
- 03शिकायत मिलने पर जांच की जाएगी और रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।
- 04एसएन कॉलेज के चिकित्सकों ने निजी प्रैक्टिस न करने का शपथ पत्र भरा है।
- 05यह कदम सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को बनाए रखने के लिए है।
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उत्तर प्रदेश में सरकारी डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर रोक लगाने के लिए डीएम मनीष बंसल ने सीएमओ के नेतृत्व में एक समिति का गठन किया है। यह समिति सरकारी डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस और अस्पतालों में सेवाएं देने की शिकायतों की जांच करेगी। इसके साथ ही, खुफिया विभाग भी इन चिकित्सकों पर नजर रखेगा, खासकर उनके आवास, अस्पताल और क्लीनिक पर। इस प्रक्रिया में वीडियोग्राफी और फोटो समेत अन्य साक्ष्य भी जुटाए जाएंगे। सीएमओ डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने कहा कि शिकायत मिलने पर जांच की जाएगी। एसएन कॉलेज के प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने बताया कि कॉलेज के स्थायी चिकित्सकों ने निजी प्रैक्टिस न करने का शपथ पत्र भरा है। यह कदम सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को बनाए रखने के लिए उठाया गया है।
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इस कदम से सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार हो सकता है, जिससे आम लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मिलेंगी।
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