भारतीय नौसेना के लिए DRDO ने विकसित किए 'वरुणास्त्र' और 'श्येना' टॉरपीडो
VIDEO: दुश्मन की पनडुब्बियों का काल बनेगा ‘वरुणास्त्र’ और ‘श्येना’, DRDO ने विकसित किया स्वदेशी टॉरपीडो, जानें इसकी ताकत
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रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने भारतीय नौसेना के लिए दो स्वदेशी टॉरपीडो 'वरुणास्त्र' और 'श्येना' विकसित किए हैं। ये टॉरपीडो दुश्मन की पनडुब्बियों को खोजकर नष्ट करने की क्षमता को बढ़ाएंगे। इससे भारतीय नौसेना की पनडुब्बी रोधी क्षमता में महत्वपूर्ण इजाफा होगा।
- 01DRDO ने 'वरुणास्त्र' और 'श्येना' टॉरपीडो विकसित किए हैं।
- 02'वरुणास्त्र' एक हैवीवेट और 'श्येना' एक लाइटवेट टॉरपीडो है।
- 03ये टॉरपीडो दुश्मन की पनडुब्बियों को खोजने और नष्ट करने के लिए बनाए गए हैं।
- 04इनका उपयोग युद्धपोतों और हेलीकॉप्टरों से किया जाएगा।
- 05इससे भारतीय नौसेना की समुद्री सुरक्षा में सुधार होगा।
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भारतीय नौसेना को अब एक नई शक्ति मिली है, क्योंकि रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने 'वरुणास्त्र' और 'श्येना' नामक दो स्वदेशी टॉरपीडो विकसित किए हैं। 'वरुणास्त्र' एक हैवीवेट टॉरपीडो है, जो इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन सिस्टम पर आधारित है और गहरे तथा उथले पानी में कार्य कर सकता है। यह आधुनिक काउंटरमेजर एनवायरनमेंट में भी लक्ष्य को ट्रैक करने की क्षमता रखता है। वहीं, 'श्येना' एक एडवांस्ड लाइटवेट टॉरपीडो है, जिसका उपयोग युद्धपोतों और हेलीकॉप्टरों से दुश्मन की पनडुब्बियों पर हमला करने के लिए किया जाएगा। इन टॉरपीडो के शामिल होने से भारतीय नौसेना की पनडुब्बी रोधी क्षमता में महत्वपूर्ण सुधार होगा। हाल ही में, DRDO ने भारतीय नौसेना को एक उन्नत 'स्टेल्थ फ्रिगेट' महेंद्रगिरि भी सौंपा है, जो युद्धपोत डिजाइन और निर्माण में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
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इस विकास से भारतीय नौसेना की पनडुब्बी रोधी क्षमता में सुधार होगा, जिससे समुद्री सुरक्षा में वृद्धि होगी।
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