राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6: उत्तर प्रदेश में स्तनपान दर में गिरावट
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 रिपोर्ट: चार में से एक ही बच्चे को जन्म के पहले घंटे में मिल रहा मां का दूध
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उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 के अनुसार, जन्म के पहले घंटे में स्तनपान कराने की दर 34.6 प्रतिशत तक गिर गई है। हालांकि, स्वास्थ्य बीमा कवरेज में सुधार हुआ है, लेकिन कई स्वास्थ्य मानकों में चिंताजनक कमी आई है।
- 01जन्म के पहले घंटे में स्तनपान कराने की दर 60% से घटकर 34.6% हो गई है।
- 02स्वास्थ्य बीमा कवरेज 15.8% से बढ़कर 37.2% हुआ है, लेकिन राष्ट्रीय मानक 60% से कम है।
- 03संस्थागत प्रसव की दर 67.8% से बढ़कर 85% हुई है।
- 04किशोरावस्था में गर्भधारण के मामलों में कमी आई है।
- 0512 से 23 माह आयु वर्ग के बच्चों का पूर्ण टीकाकरण 51.1% से बढ़कर 81.4% हो गया है।
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उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 की रिपोर्ट में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के बावजूद कई चिंताजनक आंकड़े सामने आए हैं। जन्म के पहले घंटे में स्तनपान कराने की दर 60% से घटकर 34.6% हो गई है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि शिशुओं को शुरुआती पोषण में कमी आई है। हालांकि, स्वास्थ्य बीमा कवरेज 15.8% से बढ़कर 37.2% हुआ है, लेकिन यह राष्ट्रीय मानक से कम है। संस्थागत प्रसव की दर में भी सुधार हुआ है, जो 67.8% से बढ़कर 85% हो गई है। इसके अलावा, किशोरावस्था में गर्भधारण के मामलों में कमी आई है। 2015-16 से 2023-24 के बीच स्वास्थ्य, शिक्षा, और महिला सशक्तीकरण के क्षेत्र में कई सकारात्मक बदलाव हुए हैं, जैसे कि 12 से 23 माह के बच्चों का पूर्ण टीकाकरण 51.1% से बढ़कर 81.4% हो गया है।
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स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार और स्तनपान की कमी बच्चों के पोषण पर नकारात्मक असर डाल सकती है।
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