डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के 'टू-ट्रैक' डील प्रस्ताव को ठुकराया, तनाव बढ़ा
डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान का 'टू-ट्रैक' डील प्रस्ताव ठुकराया, न्यूक्लियर डील में देरी को तैयार नहीं अमेरिका, बढ़ा तनाव
Image: Nbt Navbharattimes
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के 'टू-ट्रैक' डील प्रस्ताव को खारिज कर दिया है, जिसमें युद्ध समाप्ति के बाद परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा करने की बात कही गई थी। अमेरिका का कहना है कि दोनों मुद्दे एक साथ सुलझने चाहिए, जिससे ईरान-अमेरिका के बीच तनाव और बढ़ गया है।
- 01ईरान ने अमेरिका को युद्ध समाप्त करने के लिए 'टू-ट्रैक' प्रस्ताव दिया, जिसमें युद्ध खत्म करने और परमाणु वार्ता को अलग-अलग ट्रैक में बांटने का सुझाव दिया गया।
- 02ईरान का प्रस्ताव अमेरिका से युद्ध समाप्ति के लिए औपचारिक घोषणा, नाकेबंदी हटाने और संपत्ति रिलीज करने की मांग करता है।
- 03ट्रंप प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि युद्ध समाप्ति और परमाणु समझौता एक साथ होना चाहिए, और ईरान को एनरिच किया हुआ यूरेनियम नहीं रखने दिया जाएगा।
- 04ईरान ने 10 साल के लिए 3.6% से अधिक एनरिचमेंट रोकने का प्रस्ताव रखा है, लेकिन इसके बदले में एनरिचमेंट के अधिकार की मान्यता की मांग की है।
- 05पाकिस्तान ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है, जबकि चीन, कतर, सऊदी अरब और मिस्र सहायक भूमिकाओं में हैं।
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अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने ईरान के 'टू-ट्रैक' डील प्रस्ताव को ठुकरा दिया है, जिसमें ईरान ने युद्ध समाप्ति के बाद परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा करने का सुझाव दिया था। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि युद्ध समाप्ति और परमाणु समझौता दोनों को एक साथ सुलझाना होगा। ईरान ने अपने प्रस्ताव में युद्ध समाप्त करने के लिए औपचारिक घोषणा, अमेरिकी नाकेबंदी खत्म करने और अपनी संपत्ति को छोड़ने की मांग की है। इसके बदले में, ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और ट्रांजिट फीस माफ करने का प्रस्ताव रखा है। ईरान ने यह भी कहा है कि वह 10 साल के लिए 3.6% से अधिक एनरिचमेंट नहीं करेगा और अपने एनरिच किए गए यूरेनियम को डाइल्यूट करेगा। ट्रंप प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि ईरान को एनरिच किया हुआ यूरेनियम नहीं रखने दिया जाएगा, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है। पाकिस्तान इस वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है, जबकि चीन, कतर, सऊदी अरब और मिस्र सहायक भूमिकाओं में हैं।
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इस स्थिति का असर ईरान और अमेरिका के बीच संबंधों पर पड़ सकता है, जिससे क्षेत्रीय स्थिरता में कमी आ सकती है।
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