पंडित नेहरू का सोमनाथ मंदिर पुनर्निर्माण पर विरोध: सरदार पटेल और गांधी की राय
पंडित नेहरू ने सोमनाथ मंदिर पुर्ननिर्माण का क्यों किया था विरोध, सरदार पटेल-गांधी की क्या राय थी, राजेंद्र प्रसाद मंदिर उद्घाटन में शामिल हुए
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सोमनाथ मंदिर का उद्घाटन 11 मई 1951 को हुआ था, लेकिन पंडित जवाहरलाल नेहरू ने इसमें शामिल होने से मना कर दिया था। उन्होंने मंदिर के पुनर्निर्माण को हिंदू पुनरुत्थानवाद माना। सरदार पटेल ने पुनर्निर्माण का संकल्प लिया था, जबकि महात्मा गांधी ने सरकारी धन के बजाय जन दान से निर्माण का समर्थन किया।
- 01पंडित नेहरू ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का विरोध किया था।
- 02सरदार पटेल ने मंदिर के पुनर्निर्माण का संकल्प लिया।
- 03महात्मा गांधी ने सरकारी धन के बजाय जन दान से निर्माण का सुझाव दिया।
- 04नेहरू को भारत की धर्मनिरपेक्ष छवि की चिंता थी।
- 05मंदिर के पुनर्निर्माण के दौरान नेहरू ने 17 पत्र लिखे थे।
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सोमनाथ मंदिर का उद्घाटन 11 मई 1951 को गुजरात के प्रभास पाटन में हुआ। पंडित जवाहरलाल नेहरू ने उद्घाटन समारोह में शामिल होने से मना कर दिया, क्योंकि उन्होंने इसे हिंदू पुनरुत्थानवाद माना। उन्होंने सरदार पटेल को भी मंदिर के पुनर्निर्माण पर सरकारी धन का उपयोग न करने की सलाह दी। सरदार पटेल ने 1947 में जूनागढ़ में जनसभा के दौरान सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का संकल्प लिया था। महात्मा गांधी ने सरकारी धन के बजाय आम लोगों के दान से मंदिर निर्माण का समर्थन किया। नेहरू को चिंता थी कि सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण से भारत की धर्मनिरपेक्ष छवि को नुकसान होगा और इससे मुस्लिम समुदाय असुरक्षित महसूस करेगा। उन्होंने इस मुद्दे पर कई बार सार्वजनिक सफाई भी दी।
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