भारत-रूस व्यापार: 100 अरब डॉलर लक्ष्य की चुनौतियाँ और संभावनाएँ
क्या 100 अरब डॉलर के व्यापार का लक्ष्य हासिल कर पाएंगे भारत-रूस, क्या है अमेरिकी पाबंदियों का असर
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भारत और रूस ने द्विपक्षीय व्यापार को 2030 तक 100 अरब डॉलर तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा है। हालाँकि, अमेरिकी प्रतिबंधों और भू-राजनीतिक तनावों के बीच, भारतीय निर्यातकों के लिए यह एक बड़ा अवसर और चुनौती दोनों है। व्यापार में संतुलन बनाए रखने के लिए सावधानी बरतनी आवश्यक है।
- 01भारत और रूस का व्यापार वित्त वर्ष 2024-25 में 68.7 अरब डॉलर तक पहुँच गया।
- 02प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि दोनों देश 2030 से पहले ही 100 अरब डॉलर का लक्ष्य हासिल कर सकते हैं।
- 03अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण भारतीय कंपनियों को रूस के साथ व्यापार में सावधानी बरतने की आवश्यकता है।
- 04रूस में भारतीय निर्यातकों के लिए अवसर और चुनौती दोनों हैं।
- 05विदेश मंत्री एस जयशंकर ने दीर्घकालिक हितों को प्राथमिकता देने की बात कही।
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भारत और रूस ने अपने द्विपक्षीय व्यापार को 2030 तक 100 अरब डॉलर तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा है। वर्तमान में, भारत-रूस व्यापार वित्त वर्ष 2024-25 में 68.7 अरब डॉलर तक पहुँच गया है, जिसमें भारतीय निर्यात 4.9 अरब डॉलर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आशा व्यक्त की है कि दोनों देश इस लक्ष्य को 2030 से पहले भी हासिल कर सकते हैं। हालाँकि, अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण भारतीय कंपनियों को सावधानी बरतने की आवश्यकता है। 2024 में, अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने 21 भारतीय संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाए, जिससे यह स्पष्ट होता है कि निर्यातकों को रूस के साथ व्यापार करते समय सतर्क रहना होगा। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा है कि भारत रूस के साथ दीर्घकालिक संबंध चाहता है, लेकिन अपने दीर्घकालिक हितों से समझौता नहीं करेगा। इस प्रकार, भारतीय व्यवसायियों को रूस में अवसरों का लाभ उठाने के लिए सावधानीपूर्वक कदम उठाने की आवश्यकता है।
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यह व्यापारिक संबंध भारतीय निर्यातकों के लिए नए अवसर प्रदान कर रहा है, लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण जोखिम भी बढ़ गए हैं।
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