सुप्रीम कोर्ट में पारसी महिला के अंतरधार्मिक विवाह पर भेदभाव का मामला
अंतरधार्मिक विवाह पर पारसी महिला से भेदभाव का मामला पहुंचा SC, समान अधिकार की मांग

Image: Jagran
एक पारसी महिला, दीना बुधराजा, ने अंतरधार्मिक विवाह के कारण अपने धर्म में भेदभाव का सामना किया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर निर्णय संविधान पीठ के फैसले के बाद करने का निर्णय लिया है। दीना ने भेदभावपूर्ण नियम को चुनौती दी है, जो उसके धार्मिक अधिकारों का उल्लंघन करता है।
- 01दीना बुधराजा ने एक हिंदू पुरुष से विवाह किया लेकिन अपनी पारसी पहचान नहीं बदली।
- 02नागपुर पारसी पंचायत का नियम 5(2) पारसी महिलाओं को दूसरे धर्म में विवाह करने पर धार्मिक अधिकारों से वंचित करता है।
- 03सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, नागपुर पारसी पंचायत और महाराष्ट्र सरकार को नोटिस जारी किए हैं।
- 04दीना की याचिका में संविधान के अनुच्छेद 14, 21 और 25 का उल्लंघन बताया गया है।
- 05सुप्रीम कोर्ट का निर्णय देश की महिलाओं के लिए समानता और धार्मिक स्वतंत्रता का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।
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एक पारसी महिला, दीना बुधराजा, ने एक हिंदू पुरुष से विवाह किया, लेकिन अपने धर्म में भेदभाव का सामना करना पड़ा। नागपुर की पारसी पंचायत के नियम 5(2) के अनुसार, यदि कोई पारसी महिला दूसरे धर्म में विवाह करती है, तो उसे अज्ञारी (पारसी अग्नि मंदिर) में प्रवेश करने से रोका जाता है, जबकि पारसी पुरुषों पर ऐसा कोई प्रतिबंध नहीं है। दीना ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है, जिसमें इस भेदभावपूर्ण नियम को रद्द करने की मांग की गई है। उन्होंने तर्क किया है कि यह नियम संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), अनुच्छेद 21 (गरिमापूर्ण जीवन का अधिकार) और अनुच्छेद 25 (धार्मिक स्वतंत्रता) का उल्लंघन करता है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर निर्णय संविधान पीठ के फैसले के बाद करने का निर्णय लिया है। अब सभी की नजरें इस महत्वपूर्ण मामले पर हैं, जो महिलाओं के अधिकारों और धार्मिक स्वतंत्रता के लिए एक नई दिशा दिखा सकता है।
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सुप्रीम कोर्ट का निर्णय पारसी महिलाओं के अधिकारों और धार्मिक स्वतंत्रता पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है।
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