पंचक का महत्व और नियम: जानें क्या न करें इस दौरान
कल से शुरू हो रहा है पंचक, जानिए इससे जुड़े नियम और महत्व
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पंचक, जो 6 से 11 जून 2026 तक चलेगा, हिंदू धर्म में महत्वपूर्ण है। इस अवधि में कुछ कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है, जैसे दक्षिण दिशा में यात्रा करना, नया घर बनाना, और लकड़ी लाना।
- 01पंचक 6 जून 2026 से शुरू होकर 11 जून 2026 तक चलेगा।
- 02दक्षिण दिशा में यात्रा करना इस दौरान वर्जित है।
- 03नए घर का लेंटर डालना या भूमि पूजन करना नहीं करना चाहिए।
- 04पंचक को मृत्यु पंचक भी कहा जाता है, क्योंकि यह कष्ट और बीमारियों का संकेत देता है।
- 05यदि किसी की मृत्यु होती है, तो उसकी शांति करानी चाहिए।
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पंचक, जो 6 जून 2026 को शुरू होकर 11 जून 2026 तक चलेगा, हिंदू धर्म और ज्योतिष में महत्वपूर्ण माना जाता है। यह तब होता है जब चंद्रमा धनिष्ठा नक्षत्र के अंतिम चरण से लेकर शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्रों में भ्रमण करता है। इस अवधि में कुछ कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है, जैसे कि दक्षिण दिशा में यात्रा नहीं करना, नया घर बनाते समय लेंटर नहीं डालना, और घर में लकड़ी नहीं लाना। इसे मृत्यु पंचक कहा जाता है, क्योंकि यह कष्ट, दुर्घटनाएं, विवाद और बीमारियों के बढ़ने का डर पैदा करता है। पंचक के दौरान यदि किसी की मृत्यु होती है, तो यह मान्यता है कि इससे अन्य व्यक्तियों की मृत्यु भी हो सकती है। इसीलिए, मृतक की शांति का ध्यान रखना आवश्यक होता है।
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पंचक के दौरान कुछ कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है, जिससे लोग अपने जीवन में नकारात्मक प्रभावों से बच सकें।
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