CBSE की नई तीन-भाषा नीति पर छात्रों और अभिभावकों की चिंता
CBSE Three Language Rule: सीबीएसई 9वीं-10वीं के लिए 3 भाषा जरूरी, नाखुश हैं छात्र; पेरेंट्स बदलना चाहते हैं बोर्ड!

Image: Zee News
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने कक्षा 9वीं और 10वीं के छात्रों के लिए तीन भाषाओं का अध्ययन अनिवार्य कर दिया है, जिसमें दो भारतीय और एक विदेशी भाषा शामिल है। इस नए नियम से छात्रों और अभिभावकों में असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो गई है, जिससे कई परिवार अन्य शिक्षा बोर्डों का विकल्प तलाश रहे हैं।
- 01CBSE ने 31 मई तक तीन-भाषा नीति को लागू करने का निर्देश दिया है।
- 02छात्रों को नई भाषाओं के चयन में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है, खासकर उन छात्रों के लिए जिन्होंने पहले से विदेशी भाषाएं पढ़ी हैं।
- 03तमिलनाडु सरकार ने स्पष्ट किया है कि राज्य में दो-भाषा नीति में कोई बदलाव नहीं होगा।
- 04कई छात्र करियर काउंसलर्स से सलाह ले रहे हैं ताकि वे नए नियम को समझ सकें।
- 05दिल्ली-एनसीआर में CISCE से संबद्ध स्कूलों की बढ़ती मांग देखी जा रही है।
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केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने हाल ही में कक्षा 9वीं और 10वीं के छात्रों के लिए तीन-भाषा नीति को लागू करने का निर्णय लिया है। इस नीति के तहत, छात्रों को दो भारतीय भाषाओं और एक विदेशी भाषा का अध्ययन करना अनिवार्य होगा। यह नया नियम 31 मई तक सभी संबद्ध स्कूलों में लागू किया जाना है। हालांकि, इस निर्णय के कारण छात्रों और अभिभावकों के बीच असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो गई है। कई छात्र करियर काउंसलर्स से संपर्क कर रहे हैं ताकि वे इस नए नियम को बेहतर तरीके से समझ सकें। कुछ अभिभावक अन्य शिक्षा बोर्डों का विकल्प तलाशने पर विचार कर रहे हैं, खासकर तमिलनाडु में जहां राज्य सरकार ने पहले से लागू दो-भाषा नीति को जारी रखने का निर्णय लिया है। छात्रों को नई भाषा चुनने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है, खासकर उन छात्रों के लिए जो पहले से विदेशी भाषाएं पढ़ चुके हैं। इस स्थिति के चलते, दिल्ली-एनसीआर में CISCE से संबद्ध स्कूलों में दाखिले के लिए भी बढ़ती मांग देखी जा रही है।
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छात्रों को नई भाषाओं के अध्ययन में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उनकी पढ़ाई और करियर विकल्पों पर असर पड़ सकता है।
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