इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अवैध गिरफ्तारी पर राज्य सरकार पर लगाया 10 लाख रुपये का जुर्माना
अवैध गिरफ्तारी पर हाई कोर्ट सख्त: राज्य सरकार पर लगाया 10 लाख का जुर्माना, अधिकारियों से की जा सकती है वसूली
Jagran
Image: Jagran
इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने अवैध गिरफ्तारी के मामले में राज्य सरकार पर 10 लाख रुपये का हर्जाना लगाया है। अदालत ने कहा कि इस राशि की वसूली जिम्मेदार अधिकारियों से की जा सकती है, और गिरफ्तारी प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी को व्यक्तिगत स्वतंत्रता का उल्लंघन माना।
- 01इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अवैध गिरफ्तारी पर राज्य सरकार पर 10 लाख रुपये का हर्जाना लगाया।
- 02अदालत ने गिरफ्तारी प्रक्रिया में गंभीर त्रुटियों को व्यक्तिगत स्वतंत्रता का उल्लंघन माना।
- 03याची मनोज कुमार को तीन महीने तक अवैध रूप से जेल में रखा गया।
- 04अदालत ने कहा कि गिरफ्तारी के कारणों की जानकारी देना अनिवार्य है।
- 05यदि याची किसी अन्य मामले में वांछित नहीं है, तो उसे तुरंत रिहा करने का आदेश दिया गया।
Advertisement
In-Article Ad
इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने अवैध गिरफ्तारी के मामले में राज्य सरकार पर 10 लाख रुपये का हर्जाना लगाया है। अदालत ने कहा कि इस राशि की वसूली जिम्मेदार अधिकारियों से की जा सकती है। न्यायालय ने गिरफ्तारी प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी को व्यक्तिगत स्वतंत्रता का गंभीर उल्लंघन माना। यह आदेश न्यायमूर्ति अब्दुल मोइन और न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार श्रीवास्तव की पीठ ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका स्वीकार करते हुए पारित किया। याची मनोज कुमार ने आरोप लगाया कि उसे गिरफ्तारी के समय कारण नहीं बताए गए, जो संविधान के अनुच्छेद 21 और 22(1) का उल्लंघन है। अदालत ने कहा कि गिरफ्तारी के कारण लिखित रूप में बताना अनिवार्य है, और केवल मुकदमे का अपराध संख्या बताना पर्याप्त नहीं है। कोर्ट ने याची की तत्काल रिहाई का आदेश दिया और कहा कि यदि वह किसी अन्य मामले में वांछित नहीं है, तो उसे तुरंत मुक्त किया जाए।
Advertisement
In-Article Ad
यह निर्णय अवैध गिरफ्तारी के मामलों में नागरिकों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता की सुरक्षा को मजबूत करेगा।
Advertisement
In-Article Ad
Reader Poll
क्या आपको लगता है कि अवैध गिरफ्तारी के मामलों में सख्त कार्रवाई होनी चाहिए?
Connecting to poll...
मूल लेख पढ़ें
पूरी कहानी के लिए मूल स्रोत पर जाएं।




