भारत का स्वदेशी जोरावर टैंक: चीन के खिलाफ नई युद्ध क्षमता
जोरावर टैंक... बस नाम ही काफी है: LAC पर चीन की निकाल देगा हेकड़ी, भारत की स्वदेशी 'वॉर मशीन' की खासियत

Image: Jagran
भारत ने अपने पहले स्वदेशी लाइट टैंक 'जोरावर' का सफल रोलआउट किया है, जो विशेष रूप से हिमालयी क्षेत्रों में युद्ध के लिए डिजाइन किया गया है। यह टैंक 25 टन का है और इसकी अधिकतम गति 70 किमी प्रति घंटा है। भारतीय सेना ने इसके लिए 59 यूनिट का ऑर्डर दिया है।
- 01जोरावर टैंक को 19 महीनों में विकसित किया गया है और यह 25 टन वजन का है।
- 02इस टैंक की विशेषता है कि इसे भारतीय वायुसेना के C-17 ग्लोबमास्टर विमान के जरिए तेजी से तैनात किया जा सकता है।
- 03भारतीय सेना ने जोरावर टैंक के लिए 59 यूनिट का ऑर्डर दिया है, जबकि कुल आवश्यकता 354 टैंकों की है।
- 04जोरावर की मारक क्षमता में 105 मिमी राइफल्ड गन और नाग Mk-2 एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल शामिल हैं।
- 05इस टैंक का परीक्षण लद्दाख के न्योमा क्षेत्र में 4,200 मीटर की ऊंचाई पर सफलतापूर्वक किया गया है।
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भारत ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए अपने पहले स्वदेशी लाइट टैंक 'जोरावर' को आधिकारिक तौर पर रोलआउट किया है। यह टैंक विशेष रूप से हिमालयी और ऊंचाई वाले दुर्गम इलाकों में युद्ध के लिए डिजाइन किया गया है। इसका वजन 25 टन है और यह 70 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकता है। इसे भारतीय वायुसेना के C-17 ग्लोबमास्टर विमान से तेजी से सीमावर्ती क्षेत्रों में पहुंचाया जा सकता है। जोरावर टैंक में 105 मिमी राइफल्ड गन और नाग Mk-2 एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल जैसी आधुनिक हथियार प्रणालियाँ हैं, जिससे इसकी मारक क्षमता में वृद्धि हुई है। भारतीय सेना ने इसके लिए 59 यूनिट का ऑर्डर दिया है, जबकि कुल आवश्यकता 354 टैंकों की है। जोरावर का सफल परीक्षण लद्दाख के न्योमा क्षेत्र में 4,200 मीटर की ऊंचाई पर किया गया, जिसमें सभी प्रमुख मानकों को पूरा किया गया।
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जोरावर टैंक के विकास से भारत की रक्षा क्षमता में वृद्धि होगी, विशेषकर चीन के साथ सीमा पर।
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