झारखंड में अल्ट्रासाउंड क्लिनिकों के स्टाफ में बदलाव, तीन साल से अधिक समय से जमे कर्मियों का होगा ट्रांसफर
झारखंड में अल्ट्रासाउंड क्लिनिकों के बदले जाएंगे स्टाफ, 3 साल से ज्यादा जिले में रहने वालों का होगा ट्रांसफर
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झारखंड सरकार ने अल्ट्रासाउंड क्लिनिकों की निगरानी में पारदर्शिता लाने के लिए सभी जिलों में पीसी-पीएनडीटी एक्ट के तहत कार्यरत कर्मियों को बदले जाने का निर्णय लिया है। तीन साल से अधिक समय से एक ही जिले में रहने वाले कर्मियों का ट्रांसफर किया जाएगा।
- 01सभी जिलों में अल्ट्रासाउंड क्लिनिकों के कर्मियों को बदला जाएगा, जिनमें तीन साल से अधिक समय से जमे लोग शामिल हैं।
- 02राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक में यह निर्णय लिया गया ताकि पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।
- 03सभी अल्ट्रासाउंड क्लिनिकों की जांच के लिए तीन महीने का समय निर्धारित किया गया है।
- 04अवैध लिंग निर्धारण गतिविधियों के खिलाफ प्रभावी रणनीति बनाने पर जोर दिया गया।
- 05अनियमितता पाए जाने पर जीरो टोलरेंस नीति के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी।
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झारखंड में अल्ट्रासाउंड क्लिनिकों की निगरानी को बेहतर बनाने के लिए राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। पीसी-पीएनडीटी (गर्भधारण पूर्व एवं प्रसवपूर्व निदान तकनीक) एक्ट के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए उन सभी कर्मियों को बदला जाएगा, जो तीन साल से अधिक समय से एक ही जिले में काम कर रहे हैं। यह निर्णय सोमवार को आयोजित राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक में लिया गया, जिसमें पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। सभी जिलों के सिविल सर्जनों को निर्देश दिया गया है कि वे तीन महीने के भीतर सभी अल्ट्रासाउंड क्लिनिकों की जांच करें। इसके अलावा, अवैध लिंग निर्धारण गतिविधियों के खिलाफ प्रभावी रणनीति बनाने के लिए जिला सलाहकार समितियों की बैठकें नियमित रूप से आयोजित की जाएंगी। यदि किसी केंद्र में पीसी-पीएनडीटी एक्ट का उल्लंघन पाया जाता है, तो कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी। बैठक में यह भी कहा गया कि निरीक्षण प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाया जाएगा, और अनियमितता पाए जाने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।
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इस निर्णय से अल्ट्रासाउंड क्लिनिकों में कार्यरत कर्मियों की कार्यप्रणाली में सुधार होगा, जिससे अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण पाया जा सकेगा।
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