ई-फार्मेसी के खिलाफ हड़ताल में 2500 करोड़ रुपये का कारोबार ठप
Strike: ई-फार्मेसी के विरोध में हड़ताल से ढाई हजार करोड़ का कारोबार ठप, दिल्ली में 90 फीसदी दुकानें रहीं बंद
Amar Ujala
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ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (एआईओसीडी) के आह्वान पर एक दिवसीय हड़ताल में 12.40 लाख से अधिक केमिस्टों ने अपनी दुकानें बंद रखीं, जिससे देशभर में लगभग ₹2500 करोड़ का कारोबार प्रभावित हुआ। दिल्ली में 90 फीसदी मेडिकल स्टोर बंद रहे, जबकि सरकार से अवैध ई-फार्मेसी पर सख्त कार्रवाई की मांग की गई।
- 01हड़ताल के दौरान दिल्ली में लगभग 20,000 मेडिकल स्टोरों में से 18,000 दुकानें बंद रहीं।
- 02हड़ताल के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें अवैध ई-फार्मेसी पर रोक लगाने की मांग की गई।
- 03केमिस्टों का कहना है कि ऑनलाइन दवा बिक्री से मरीजों की सुरक्षा को खतरा है।
- 04दिल्ली रिटेल डिस्ट्रीब्यूशन केमिस्ट अलायंस के अध्यक्ष संदीप नांगिया ने बड़े ई-फार्मेसी प्लेटफॉर्मों की नीतियों की आलोचना की।
- 05प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्र के रिटेलर्स ने हड़ताल का बहिष्कार किया और अपनी दुकानें खोली रखीं।
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ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (एआईओसीडी) ने अवैध ऑनलाइन दवा बिक्री और बिना नुस्खे की होम डिलीवरी के खिलाफ एक दिवसीय हड़ताल का आयोजन किया, जिसमें 12.40 लाख से अधिक केमिस्टों ने भाग लिया। इस हड़ताल से पूरे देश में लगभग ₹2500 करोड़ का खुदरा कारोबार प्रभावित हुआ। दिल्ली में, 20,000 में से 90 फीसदी मेडिकल स्टोर बंद रहे, जबकि बड़े अस्पतालों के आसपास की कुछ दुकानें खुली रहीं। एआईओसीडी के अध्यक्ष जेएस शिंदे और महासचिव राजीव सिंघल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ज्ञापन सौंपा, जिसमें अवैध ई-फार्मेसी पर सख्त रोक लगाने की मांग की गई। हड़ताल के दौरान, केमिस्टों ने बताया कि ऑनलाइन दवा बिक्री से मरीजों की सुरक्षा को खतरा है और छोटे केमिस्टों की आजीविका प्रभावित हो रही है। हालांकि, प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्र के रिटेलर्स ने हड़ताल का बहिष्कार किया, यह कहते हुए कि इससे आम लोगों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
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इस हड़ताल से दवा की उपलब्धता प्रभावित हुई है, जिससे मरीजों को दवाएं प्राप्त करने में कठिनाई हो सकती है।
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