पंचकूला नगर निगम में अनुसूचित जाति आरक्षण का निर्णय रद्द
पंचकूला नगर निगम में SC आरक्षण घटाने का फैसला रद, जनगणना से ही तय होगा रिजर्वेशन; हाईकोर्ट का बड़ा आदेश
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पंचकूला नगर निगम में अनुसूचित जाति (एससी) के लिए आरक्षित सीटों की संख्या घटाने का राज्य सरकार का निर्णय उच्च न्यायालय ने रद्द कर दिया है। अदालत ने कहा कि यह निर्णय संविधान के प्रावधानों के खिलाफ है और आरक्षण केवल 2011 की जनगणना के आधार पर किया जाना चाहिए।
- 01पंचकूला नगर निगम में एससी सीटों की संख्या 4 से घटाकर 3 करने का निर्णय रद्द किया गया।
- 02उच्च न्यायालय ने कहा कि यह निर्णय संविधान के अनुच्छेद 243T के खिलाफ है।
- 03आरक्षण का निर्धारण केवल 2011 की जनगणना के आंकड़ों पर होना चाहिए।
- 04राज्य सरकार ने FIDR का उपयोग किया, जो असंवैधानिक है।
- 05अदालत ने सभी लंबित आवेदनों का निपटारा किया।
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पंचकूला नगर निगम में अनुसूचित जाति (एससी) के लिए आरक्षित सीटों की संख्या को 4 से घटाकर 3 करने का हरियाणा राज्य सरकार का निर्णय उच्च न्यायालय ने रद्द कर दिया है। अदालत ने कहा कि यह निर्णय संविधान के अनुच्छेद 243T के प्रावधानों के खिलाफ है। अदालत ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार ने सीटों के निर्धारण के लिए फैमिली इंफॉर्मेशन डेटा रिपॉजिटरी (FIDR) का सहारा लिया, जबकि एससी आबादी के लिए आरक्षण केवल 2011 की जनगणना के आधार पर होना चाहिए। न्यायालय ने कहा कि पंचकूला नगर निगम की भौगोलिक सीमाओं में बदलाव के बाद, जनगणना के आंकड़ों के अनुसार आबादी की गणना की जानी चाहिए थी। अदालत ने 4 सितंबर 2025 की अधिसूचना को असंवैधानिक बताते हुए रद्द कर दिया और कहा कि आरक्षण केवल पुनर्गठित नगर निगम क्षेत्र की पूरी आबादी की गणना के बाद लागू किया जा सकता है।
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इस निर्णय का प्रभाव पंचकूला नगर निगम में एससी समुदाय के सदस्यों पर पड़ेगा, जो अधिक सीटों के माध्यम से राजनीतिक प्रतिनिधित्व की उम्मीद कर सकते हैं।
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