तेल की कीमतें 100 डॉलर के पार, अमेरिका-ईरान तनाव का असर
तेल 100 डॉलर पार, अमेरिका के इस फैसले से मचा हड़कंप
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कच्चे तेल की कीमतें सोमवार को 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गईं, जिसका कारण अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का विफल होना और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ता तनाव है। ब्रेंट क्रूड की कीमत 102.80 डॉलर और अमेरिकी कच्चा तेल WTI की कीमत 104.88 डॉलर हो गई है।
- 01कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गईं।
- 02अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत विफल हुई।
- 03स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में नाकाबंदी की तैयारी की जा रही है।
- 04विशेषज्ञों के अनुसार, रोजाना 20 लाख बैरल तेल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है।
- 05सऊदी अरब ने अपनी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन की क्षमता बहाल कर दी है।
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सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई, जिससे यह 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई। इसका मुख्य कारण अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध समाप्त करने की बातचीत का विफल होना है। ब्रेंट क्रूड की कीमत 102.80 डॉलर प्रति बैरल हो गई, जबकि अमेरिकी कच्चा तेल WTI 104.88 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नाकाबंदी की तैयारी शुरू कर दी है, जिससे ईरान से जुड़े तेल की सप्लाई पर असर पड़ सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, इससे रोजाना 20 लाख बैरल तेल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने चेतावनी दी है कि कोई भी सैन्य जहाज अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास आता है, तो उसे सीजफायर का उल्लंघन माना जाएगा। इस बीच, सऊदी अरब ने अपनी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन की पूरी क्षमता बहाल कर दी है, जो 70 लाख बैरल रोजाना है।
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तेल की बढ़ती कीमतों से उपभोक्ताओं पर ईंधन की लागत बढ़ने का असर पड़ेगा, जिससे दैनिक जीवन की महंगाई में वृद्धि हो सकती है।
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