एम्बुलेंस को रास्ता न देने पर जुर्माना और कानून की सख्ती
सड़क पर एम्बुलेंस को रास्ता न देना पड़ सकता है महंगा, जानिए कितना है जुर्माना और क्या कहता है कानून
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भारत में एम्बुलेंस को रास्ता न देने पर 10,000 रुपये तक का जुर्माना और 6 महीने तक की जेल हो सकती है। मोटर वाहन कानून के तहत एम्बुलेंस को विशेषाधिकार प्राप्त वाहन माना गया है, और इसके सायरन बजने पर अन्य वाहनों को तुरंत रास्ता देना अनिवार्य है।
- 01एम्बुलेंस को रास्ता न देने पर 10,000 रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।
- 02बार-बार नियम तोड़ने पर 6 महीने तक की जेल की सजा हो सकती है।
- 03सीसीटीवी और डैशबोर्ड कैमरे नियमों का उल्लंघन करने वालों की पहचान करते हैं।
- 04ड्राइवरों को एम्बुलेंस के लिए स्थान छोड़ने के लिए सावधानी बरतनी चाहिए।
- 05सड़क पर समझदारी और संवेदनशीलता किसी की जान बचा सकती है।
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भारत में एम्बुलेंस को रास्ता न देने की घटनाएं बढ़ रही हैं, जो न केवल गैरकानूनी हैं बल्कि मानवता के खिलाफ भी हैं। मोटर वाहन कानून के अनुसार, एम्बुलेंस को विशेषाधिकार प्राप्त वाहन माना गया है, और इसके सायरन बजने पर अन्य वाहनों को तुरंत रास्ता देना चाहिए। यदि कोई चालक जानबूझकर एम्बुलेंस को रास्ता नहीं देता है, तो उसके खिलाफ 10,000 रुपये तक का जुर्माना और 6 महीने तक की जेल की सजा हो सकती है। सड़कों पर लगे सीसीटीवी कैमरे और एम्बुलेंस में मौजूद डैशबोर्ड कैमरे नियमों का उल्लंघन करने वालों की पहचान करते हैं। एम्बुलेंस के सायरन या फ्लैश लाइट के साथ चलने पर, ट्रैफिक जाम या रेड लाइट पर भी रास्ता देना अनिवार्य है। इसलिए, सभी ड्राइवरों को एम्बुलेंस का ध्यान रखते हुए अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए, जिससे किसी की जान बचाई जा सके।
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यह नियम सड़क पर एम्बुलेंस के लिए रास्ता न देने की घटनाओं को कम कर सकता है, जिससे आपातकालीन सेवाओं की गति बढ़ेगी।
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