मदर्स डे पर वृद्धाश्रम में रह रही माताओं की मार्मिक कहानियाँ
मदर्स डे : जिनके पालन-पोषण में गुजार दिया जीवन...उन्होंने ही पहुंचा दिया वृद्धाश्रम
Amar Ujala
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मदर्स डे के अवसर पर फरेंदा, उत्तर प्रदेश के आधारशिला वृद्धाश्रम में रह रही माताएं अपने बच्चों की कमी महसूस कर रही हैं। उन्होंने अपने जीवन का अधिकांश हिस्सा अपने बच्चों के पालन-पोषण में बिताया, लेकिन अब वृद्धावस्था में वे अकेली और बेसहारा हैं।
- 01वृद्धाश्रम में माताओं की कहानियाँ उनके बच्चों द्वारा त्यागे जाने की हैं।
- 02कई माताएं पति की मृत्यु के बाद बेसहारा हो गईं।
- 03आधारशिला वृद्धाश्रम में 51 महिलाएं और 56 पुरुष बुजुर्ग रह रहे हैं।
- 04बुजुर्गों की देखभाल करना समाज का दायित्व है।
- 05माताएं अपने बच्चों की सलामती की दुआ कर रही हैं।
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फरेंदा, उत्तर प्रदेश के आधारशिला वृद्धाश्रम में मदर्स डे के अवसर पर रह रही माताएं अपने बच्चों की याद में दिन गुजार रही हैं। ये महिलाएं अपने जीवन का अधिकांश हिस्सा अपने बच्चों के पालन-पोषण में बिताने के बाद अब वृद्धावस्था में अकेली और बेसहारा हैं। कुछ माताएं तो अपने बेटों द्वारा घर से निकाली गई हैं, जबकि अन्य पति की मृत्यु के बाद अपने परिवार में असुरक्षित महसूस कर रही हैं। वृद्धाश्रम में रह रही प्रभा देवी, राजमती देवी, बच्ची देवी, और बरसाती देवी जैसी महिलाएं अपने बच्चों के प्रति अपनी भावनाएं व्यक्त कर रही हैं। आधारशिला वृद्धाश्रम के प्रबंधक प्रदीप कटियार ने बताया कि यहां बुजुर्गों की उचित देखभाल की जाती है, जिसमें खान-पान और स्वास्थ्य संबंधी देखभाल शामिल है। इस वृद्धाश्रम में कुल 107 बुजुर्ग रह रहे हैं, जिनकी सेवा करना ईश्वर सेवा के समान है।
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यह कहानी समाज में बुजुर्गों की देखभाल की आवश्यकता और परिवारों में उनके प्रति संवेदनशीलता की कमी को उजागर करती है।
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