हिमाचल में ड्रोन और रोबोट की नई तकनीक से बढ़ेगी सुरक्षा और राहत कार्यों की क्षमता
Himachal: आसमान से ड्रोन दिखाएगा रास्ता, जमीन पर रोबोट बचाएगा जिंदगी, आईआईटी मंडी ने विकसित की तकनीक
Amar Ujala
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आईआईटी मंडी के शोधकर्ताओं ने एक नई तकनीक विकसित की है जिसमें ड्रोन और ग्राउंड रोबोट एक-दूसरे के साथ मिलकर कार्य करते हैं। यह प्रणाली हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी क्षेत्रों में आपदा प्रबंधन, निगरानी और अग्निशामक कार्यों में सहायता कर सकती है।
- 01ड्रोन और ग्राउंड रोबोट का समन्वय आपदा प्रबंधन में मददगार होगा।
- 02यह तकनीक सेना के लिए दुर्गम क्षेत्रों में निगरानी और रसद पहुंचाने में सहायक है।
- 03कृषि में फसलों की निगरानी और संसाधनों की आपूर्ति के लिए उपयोगी।
- 04आग बुझाने के लिए बहुमंजिला इमारतों में नई तकनीक का प्रयोग।
- 05आईआईटी मंडी के शोधकर्ताओं ने इस तकनीक का विकास किया है।
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आईआईटी मंडी के शोधकर्ताओं ने एक नई सहकारी प्रणाली विकसित की है जिसमें ड्रोन (अनमैन्ड एरियल व्हीकल) और ग्राउंड रोबोट (अनमैन्ड ग्राउंड व्हीकल) एक-दूसरे को ट्रैक करते हुए काम करते हैं। यह तकनीक विशेष रूप से हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी क्षेत्रों में आपदा प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण है, जहां भूस्खलन और बाढ़ जैसी घटनाएं आम हैं। ड्रोन जमीन पर मौजूद रोबोट की स्थिति को ट्रैक करता है और उसके अनुसार अपनी दिशा तय करता है। वहीं, ग्राउंड रोबोट ड्रोन की स्थिति के अनुसार आगे बढ़ता है। यह प्रणाली न केवल आपदा प्रबंधन में बल्कि सेना के लिए भी नई संभावनाएं खोलती है, जहां यह दुर्गम क्षेत्रों में निगरानी और रसद पहुंचाने में मदद कर सकती है। इसके अलावा, कृषि में फसलों की निगरानी और संसाधनों की आपूर्ति के लिए भी यह तकनीक उपयोगी साबित होगी। बहुमंजिला इमारतों में आग बुझाने के लिए भी इसका एक नया मॉडल विकसित किया गया है, जिसमें ड्रोन ऊपरी मंजिलों तक पहुंचकर आग की पहचान करेगा और रोबोट पानी की सप्लाई सुनिश्चित करेगा।
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यह तकनीक हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी क्षेत्रों में आपातकालीन स्थितियों में राहत कार्यों को तेजी से और सुरक्षित तरीके से पूरा करने में मदद करेगी।
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