आईआईटी मंडी की टीम ने विकसित किया ऑटोनोमस व्हीलचेयर प्रोटोटाइप
ऑटोनोमस व्हीलचेयर प्रोटोटाइप: सोचने और हाव-भाव से चलेगी व्हीलचेयर, आईआईटी मंडी की टीम ने की तैयार
Amar Ujala
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आईआईटी मंडी, हिमाचल प्रदेश, भारत की टीम ने एक ऑटोनोमस व्हीलचेयर प्रोटोटाइप विकसित किया है जो व्यक्ति के हाव-भाव और संकेतों को समझकर स्वयं चल सकेगी। यह तकनीक शारीरिक रूप से अक्षम लोगों के लिए आत्मनिर्भरता बढ़ाने का प्रयास करेगी।
- 01आईआईटी मंडी की टीम ने ऑटोनोमस व्हीलचेयर प्रोटोटाइप विकसित किया है।
- 02यह व्हीलचेयर व्यक्ति के हाव-भाव और संकेतों को समझकर चल सकेगी।
- 03इसका उपयोग शारीरिक रूप से अक्षम लोगों के लिए आत्मनिर्भरता बढ़ाने में किया जाएगा।
- 04व्हीलचेयर में लगे सेंसर बाधाओं को पहचानकर दिशा बदल सकेंगे।
- 05भविष्य में इसका उपयोग घरों, अस्पतालों और एयरपोर्ट पर किया जा सकेगा।
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आईआईटी मंडी, हिमाचल प्रदेश, भारत के एआई एवं रोबोटिक्स विभाग की टीम ने एक ऑटोनोमस व्हीलचेयर प्रोटोटाइप विकसित किया है, जो व्यक्ति के हाव-भाव और संकेतों को समझकर स्वयं चल सकेगी। इस परियोजना का नेतृत्व प्रोफेसर लक्ष्मीधर बेहरा कर रहे हैं, और इसमें डॉ. अमित शुक्ला एवं प्रशिक्षुओं की टीम शामिल है। वर्तमान में, अधिकांश व्हीलचेयर को चलाने के लिए किसी अन्य व्यक्ति की मदद, रिमोट या वॉयस कमांड की आवश्यकता होती है। लेकिन नई तकनीक में लगे कैमरे और सेंसर व्यक्ति के हाव-भाव को समझेंगे, जिससे व्हीलचेयर स्वतः आगे बढ़ेगी और दिशा बदलेगी। यह तकनीक विशेष रूप से उन लोगों के लिए फायदेमंद होगी जो पूरी तरह से शारीरिक रूप से अक्षम हैं और अपनी छोटी-छोटी जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर रहते हैं। टीम का मानना है कि यह व्हीलचेयर रास्ते में आने वाली बाधाओं को भी पहचान सकेगी। यदि सामने कोई व्यक्ति, दीवार या अन्य रुकावट होगी, तो सेंसर उसे भांपकर रास्ता बदल देंगे। भविष्य में, इसका उपयोग घरों, अस्पतालों और एयरपोर्ट जैसे स्थानों पर किया जा सकेगा।
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यह तकनीक शारीरिक रूप से अक्षम लोगों को अधिक आत्मनिर्भर बनाने में मदद करेगी, जिससे उनकी दैनिक गतिविधियों में सुधार होगा।
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